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04 April 2009

संगम जबलपुर में होगा

प्रमेन्द्र प्रताप सिंह गंगा जल लाएं हैं साथ अपने कल कोशिश करूंगा भेढ़ाघाट जाकर नर्मदा-जल से मिला कर , वैसे पावन घोषित होने के बाद भी "शुद्धता'' के सन्दर्भों में शुद्ध नहीं होगा मुझे न जी आपको भी ज्ञात है । फ़िर भी आज आपको बता दूँ प्रमेन्द्र प्रताप सिंह कल पूरे दिन और रात को डिनर तक हम सब साथ होंगे ।
क्या पूछा आपने हम सब में कौन कौन होंगे ...?
"अरे भाई हम सब यानी हम सब हाँ जी हम सब "
"बाहर से .....?"
जी बाहर से आने वाले हैं ........... महाशक्ति जिसका साफ़ अर्थ है हम सब ।
हम सब
एक कहानी सुनियेगा जी सॉरी पढियेगा पढिये न पढिये छाप देता हूँ । सो सुनिए बवाल जी एक पत्थर था सड़क पर बीचों बीच पडा एक समस्या की तरह । इन चार ने एक के अनुरोध पे सड़क पे पड़े उस पत्थर को हटाने की कोशिश की ताक़त चारों मिल कर लगा तो रहे थे किंतु पत्थर न तो टस हुआ न मस तभी अपनेडूबे जी ने संजू ब्लॉगर जो हमारी बीच के लाल बुझ्कड़ से पूछ कर तरकीब सोची पत्तर हटाने की । वो भी ना कामयाब रही आनन् फानन समीर जी मीत के गीत सुनाने निकले कोलकता वहाँ से महाशक्ति को इलाहाबाद में ही न्योत आए की भैया पत्थर हटाना है चलो जबलपुर । सो आ गए भाई जी देखें इस कहानी में कौन सा मोड़ आता है ?
जो भी होगा कल देर रात बांचियेगा तब तक कुछ सोचने दीजिए ।