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11 October 2008

मुश्किल है तो बस शरूआत करना

किसी कार्य की शुरूआत करना बहुत ही कठिन होता है । मन में तरह के सवाल उठते हैं , नयापन से कुछ घबराहट भी होती है । हम अपने नये कार्य को लेकर चिंतित भी रहते है । जहन में ये भी बात रहती है कि जो मैं कर रहा हूँ वह कैसा ? सफलता मिलेगी या नहीं याफिर मैं इसे पूरा भी कर पाऊंगा कि नहीं। इसी जद्दोजहद के बीच इंसान का आत्मविश्वास और कार्य के प्रति लगन की भावना उसे नये कार्य को करने के लिए प्रेरित करती है । बदलाव इंसान की जरूरत है पर बदलाव का क्रमिक रूप से होना बहुत ही जरूरी है एकाएक परिवर्तन को हम सही से अपना नहीं पाते है याफिर मुश्किल से सहेज पाते है ।

इस लिये जरूरत है तो बस एक कदम आगे बढ़ाने की । रास्ते खुद ब खुद बनते जायेगें ।