महाशक्ति समूह
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23 February 2009
सुभाषित क्रमांक - 2
रामचरित मानस से
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पर हित सरिस धर्म नहीं भाई।
पर पीड़ा नहिं अधमाई।।
अर्थ - भगवान श्री राम अपने भाईयों से कहते है - हे भाई! दूसरों की भलाई करने के समान कोई धर्म नही है। दूसरों को दु:ख पहुँचाने के समान कोई पाप नहीं है।
22 February 2009
सुभाषित क्रमांक - 1
बाल्मीकीय रामायण से-
उत्साहो बलवानार्य नास्त्युसाहात्परं बलम् ।
सोत्साहस्य हि लोकेशु, न किंचिदपि दुर्लभम्।।
अर्थ - उत्साह बलवान होता है, उत्साह से बढ़कर दूसरा कोई बल नही है, उत्साही व्यक्ति के लिये संसार में कुछ भी दुर्लभ नही है।
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