21 October 2008

कितना कठिन है सबको साथ लेकर चलना


"अनूप जी"की एक लाइना देख कर लगता है की एक दूसरे से जुड़ने में कितना आनंद है । 'अनपेक्षित विवाद
को लेकर जो बबाल मचा "उस पर अनूप जी ने बस इतना कहा लिखते रहिए !" वास्तव में लिखने की धारा में कमी हो उनका उद्द्येश्य है इसके पीछे । इसमें बुराई क्या है अगर बुराई है तो "इनके"कार्यो में रचनात्मकता की चेतना के अभाव को देखा जा सकता है । राज ठाकरे जैसे व्यक्तियों को कितना भी राज़ ठाकरे जी "सादर-अभिवादन"">समझाया जाए हजूर के कानों में जूँ भी न रेंगेगी तो ये भी जान लीजिए हजूर "जिंदगी "से हिसाब मांगती रहेगी कल की घड़ी तब आप भौंचक रह जाएंगे और तब आपके आंसू निकल आएँगे ये तय है। ये हम नहीं लोगों का कहना है जिन को आप क्षेत्र,भाषा,धर्म,प्रांत,के नाम पर तकसीम कर रहें हैं । "वशीकरण, सम्मोहन व आकर्षण हेतु “' किसी का या "मन्त्र"-का उपयोग करिए । "ताना-बाना"बिनतीं, विघुलता का स्वागत
विघुलता जी एक अच्छी साहित्य कार होने के साथ साथ पत्रकारिता से भी सम्बद्ध हैं तथा सभी ब्लॉगर जो आज की चर्चा में शामिल हैं उनका हार्दिक सम्मान जिनके चिट्ठे छूट गए उनसे क्षमा याचना के साथ
आपका स्नेह एवं कभी कभार कोप भाजन
गिरीश बिल्लोरे मुकुल

18 October 2008

आतंकवादियों को मारो मत भारतरत्न का अर्वाड दो

आज हिन्दुस्तान में सत्ताधारी नेता बाटला हाउस में मारे गये आतंकवादियों के पझ में खडे़ हैं और जिस तरह से ब्यानबाजी कर रहें है लगता है पुलिस ने आतंकवादियों को मार कर कोई गुनाह किया हो। आमिताभ बच्चन के पिछलग्गु नेता अमर सिंह इस मामले में पुलिस बालों पर पहले अगुली उठा चुके हैं और उनका केस भी लड़ने को तौयार हैं आज सत्ता पक्ष के नेता इस होड़ में उलझें हैं कि कौन कितना ज्यादा आतंकवादियों का हिमायती है। काग्रेंस कुछ के नेता प्रधानमंत्री से मिल कर बाटला हाउस में मारे गये आतंकवादियों के मारे जाने पर पुलिस के कार्यवाही पर प्रश्नचिन्ह लगाने गये थे। वैसे पुलिस को क्लिनचीट सुरक्षा सलाहकार नारायणन दे चुके हैं। वैसे आजकल आतंकवादियों के सर्मथक नेताओ का लिस्ट कुछ ज्यादा बडा़ होता जा रहा है सबसे पहले बाटला हाउस मामलें मे अर्जुन सिंह ने आतंकियों के केस लड़ने का मनसा जाहिर किया था। तो रामविलास पासवान जो हमेशा से ओसामा बिन लादेन के हमसक्ल को साथ में लेकर चलते हैं क्यों पीछे रहते लगे हाथ उसने भी ब्यान जारी करके आतंकियों के साथ गलवहिया डालना सुरु किया फिर क्या था लालु प्रसाद कहा पीछे रहने बाले थे लगे हाथ उन्होंने भी अपनी देशभक्ति का पिटारा खोल कर रख दिया।
आखीर कब तक मुस्लिम तुस्टीकरण का खेल इस देश में चलता रहेंगा। आखिर कब तक इस देश में अल्पसंख्यक असुरक्षा के नाम पर दबाब डाल कर अपना उल्लु साधते रहेगा। हिन्दुस्तान ऎसा देश है जहा के अल्पसंख्यक सबसे ज्यादा सुरक्षीत है। पुरे विश्व में 57 मुस्लिम देश है जो किसी तरह का हज में सब्सिडी नही देता है लेकिन हिन्दुस्तान में मुस्लमानों को सब्सिडी दिया जाता है मुस्लमानों सभी हवाई अड्डा पर सिर्फ साल में कुछ दिन खुलने बाला पाँच सितारा हज हाउस बनाकर दिया गया। आतंकवाद का नर्सरी को सरकार के द्वारा पैसा मुहया किया जाता है मस्जिदों के मरम्मत के नाम पर करोडों खर्च करती है सरकार क्या ये सब सुविधा हिन्दुओ को मिलता है आज हिन्दुस्तान में हिन्दुओ के मुकाबले ज्यादा सुविधा दी जा रही है मुस्लिमानों को। हिन्दुस्तान के मुस्लिम बहुल राज्य में हिन्दु मुख्यमंत्री नही बन सकता है मुस्लिम उत्पात मचा कर रख देंगे। जैसा कि अफजल को फांसी के मामले में उन्होंने पहले सभी को चेता दिया है अगर अफजल को फांसी दिया गया तो देश में दंगा भरक जायेगा। लेकिन हिन्दु बहुल राज्य में मुस्लिम मुख्यमंत्री बने है और आगे भी बनते रहेंगे। हिन्दुस्तान के कुछ नेता के नासमझी के कारण हिन्दुस्तान अपना 30% जमीन का टुकरा अल्पसंख्यक को अलग देश के लिये दे दिया लेकिन हिन्दु अयोध्या में एक मन्दिर बनाने के लिया अल्पसंख्यक के आगे निहोरा कर कर रहा है। गोधरा में मारे गये हिन्दु के बाद भडके दंगा का नासुर आज भी सभी को जला रहा है सेकुलर इसे हिन्दु के लिये सबसे बडा़ कलंक बना दिया हो लेकिन मोपला, कलकत्ता, भागलपुर जैसे हजारों दंगा हुआ जिसमें मारे गये हिन्दुओं पर आज कोई आँसु बहाने बाला नही है। जम्मु काश्मिर से 4 लाख से ज्यादा हिन्दुओं को लात मार कर निकाल बाहर कर दिया गया किसी के आँख में आसु नही आया कोई नेता, सेकुलर एक शब्द इस मामले में नही बोला। आज पाकिस्तान और बाग्लादेश में हिन्दुओ की हालत जानवरों से भी बत्तर है उन्के 12 साल की लडकियों को घर से उठा कर बालात्कार किया जा रहा है जबरदस्ती शादी किया जा रहा है किसी ने नही बोला लेकिन दो आतंकवादियों के मरने पर इतना हायतैबा मचा रखे है जैसे इनका अपना सगा बाला मारा गया हो। मुलायम सिंह यादव और आमिताभ बच्चन के पिछल्लगु अमर सिंह अगर चिल्लम पो मचाते हैं तो समझ में आता है क्यों कि एक आतंकवादि तो उन्ही के पार्टी के जिला अध्यक्ष का बेटा था।
अब समय आ गया है यैसे नेताओ से पुछने का कब तक ये अल्पसंख्यक असुरक्षा के नाम पर ब्लैकमेलिग का खेल खेला जायेगा और देश को गर्त में ढकेलने का काम ये नेता करते रहेंगे। हिन्दुस्तान के अल्पसंख्यक से ज्यादा किसी और देश का अल्पसंख्यक सुरक्षीत नही है उन्हें जितना सहुलियत हिन्दुस्तान में मिलता है उतना और किसी देश में नही मिलता है लेकिन फिर ये क्यों दिखाने का कोशीश किया जाता है कि हिन्दुस्तान में अल्पसंख्यक असुरक्षा है। उन्हें किसी भी तरहा का सुविधा यहा नही मिल रहा है। अल्पसंख्यक को अगर ऎसा लगता है तो उन्हें किसी ने रोका नही है अपना रास्ता नापे और कही जाकर सुरक्षीत ठीकाना का खोज लें और हमें शान्ती से रहने दें।

http://ckshindu.blogspot.com

15 October 2008

गंदे हाथ धोया क्या ?

आज हैप्पी वास डे है । आपको जैसे मालूम नहीं था वैसे मुझे भी नहीं पता था अगर मेरा दोस्त ना फंछता कि " आज तुमने हाथ धोया तो मैंने सोचा क्या फालतू सवाल है ? तब बताया उसने ये बात । पता नहीं भैया कौन - २ से दिवस मनाने होगें । देखिये कहीं ऐसा न हो कि जीते जी खुद के लिए मरण दिवस का भी प्रचलन हो सकता है । आज हाथ तो धो ही लेना । बाकी का काम कीटाणु करेंगे ।

14 October 2008

I’m Tarun Joshi basically from a small town of Pali district in Rajasthan state called as Rani.
I’m a 20year old boy who wants to do something new & passionate about doing some extraordinary works. In connection of same I just want to perform an all Rajasthan bicycle tour with the aim of mobilizing & motivate the public for water & soil conservation & Child rights with the title of stop child labor & move them into the schools. I’ll visit every district includes it’s headquarter.

My route chart is as followed.
Proposed Bicycle tour
(Bus)
Rani → PALI → Sirohi → Jalore → Badmer → Jaisalmer → Jodhpur
(START) ↓
Nagaur

Sikar → JAIPUR Ajmer
↑ (FINISH) start from 14th Nov. 2008 ↓
Churu Tonk
↑ ↓
Bikaner Bhilwara
↑ ↓
Shri Ganga Nagar RajSammand
↑ ↓
Hanuman Garh Uaipur
↑ ↓
Jhunjhanu Dungar Pur
↑ ↓
Alwar Banswara
↑ ↓
Bharat Pur Chittorgarh
↑ ↓
Dhol Pur Jhalawar
↑ ↓
Karauli ← Dausa ← Sawai Madhopur ← Bundi ← Baran ← Kota


My requirements are following
1. Laptop
2. Projector
3. Digital Photo Camera
4. Digital Movie Camera (optional)
5. Transparencies/CD’s/ DVD’s (regarding the issue)

BUDGET
CEREMONEY స్టార్ట్ 10000
LAPTOP 38000
PROJECTOR 20000
DIGITAL PHOTO CAMERA 10000 Important
DIGITAL MOVIE CAMERA 25000
TRANSPERENCIES 5000
TRANSPORTATION (CYCLE WITH GEAR) 15000 Important
FILMS RELATED TO TOPICS 5000
DAILY ALLOWNCE (3 MONTHS*500 DAILY) 45000 Important
CEREMONEY FINISH 20000

TOTAL 193000
TENTATIVE AMOUNT (MINIMUM) 170000
TENTATIVE AMOUNT (MAXIMUM) 200000
IMPORTANT ITEMS + HAND MIC WITH BATTERIES+ Misc. (70000+10000+15000) 100000 With a low budget

You can donate me some amount as per your will to my following accounts..
S.B.B.J : 61024544064] The Bank of Rajasthan Ltd. 0270101418195] IDBI 273104000029500
Suggestions are required about the program.
With best regards,

Tarun Joshi “NARAD” (Writer & Poet)
Behind Panchayat Samiti,
Kenpura Road,
RANI (PALI) 306115
Phone 02934-222665(R)
9251610562 (M)
Email me on tdjoshi_narad@yahoo.co.in

13 October 2008

स्वामी विवेकानंद जी कहते है -

"तुम्‍हारे भविष्‍य को निश्चित करने का यही समय है। इस लिये मै कहता हूँ, कि तभी इस भरी जवानी मे, नये जोश के जमाने मे ही काम करों। काम करने का यही समय है इसलिये अभी अपने भाग्‍य का निर्णय कर लो और काम में जुट जाओं क्‍योकिं जो फूल बिल्‍कुल ताजा है, जो हाथों से मसला भी नही गया और जिसे सूँघा ही नहीं गया, वही भगवान के चरणों मे चढ़ाया जाता है, उसे ही भगवान ग्रहण करते हैं। इसलिये आओं ! एक महान ध्‍येय कों अपनाएँ और उसके लिये अपना जीवन समर्पित कर दें "

11 October 2008

मुश्किल है तो बस शरूआत करना

किसी कार्य की शुरूआत करना बहुत ही कठिन होता है । मन में तरह के सवाल उठते हैं , नयापन से कुछ घबराहट भी होती है । हम अपने नये कार्य को लेकर चिंतित भी रहते है । जहन में ये भी बात रहती है कि जो मैं कर रहा हूँ वह कैसा ? सफलता मिलेगी या नहीं याफिर मैं इसे पूरा भी कर पाऊंगा कि नहीं। इसी जद्दोजहद के बीच इंसान का आत्मविश्वास और कार्य के प्रति लगन की भावना उसे नये कार्य को करने के लिए प्रेरित करती है । बदलाव इंसान की जरूरत है पर बदलाव का क्रमिक रूप से होना बहुत ही जरूरी है एकाएक परिवर्तन को हम सही से अपना नहीं पाते है याफिर मुश्किल से सहेज पाते है ।

इस लिये जरूरत है तो बस एक कदम आगे बढ़ाने की । रास्ते खुद ब खुद बनते जायेगें ।

10 October 2008

लेस्बियन यानी "समलैंगिकता " बनाम भारत ? ये संबध भारतीय संस्कृति के लिए खतरा

विश्व पटल पर कोई आवाज अगर बुलंद होती है तो इसका असर दुनिया के कर कोने पर होता हैं। हाल में ही भारत सहित विश्व के कई देशों में लेस्बियन यानी " समलैंगिता" का हो हल्ला रहा । दिल्ली , मुम्बई सहित विश्व के कई शहरों में कदम ताल हुआ। भारत में भी लोगों ने अपनी बुलंद आवाज में समलैंगिकता को सही ठहराते हुए इसे संवैधानिक दर्जा देने की हिमाकत की।भारत में समलौंगिक सम्बंध को जुर्म करार दिया गया है । दो एक ही सेक्स के लोगों के बीच का संबध कानूनी तौर गलत होगा। और इस तरह के कार्य पर कानूनी दाव पेंच में फंस जायेगें। पर इसके ठीक विपरीत केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदौस ने समलैगिकता को उचित ठहराया है । पर कोर्ट ने स्वास्थ्य मंत्रालय की अर्जी को खारिज कर दिया । और रामदौस के बयान को भी अंदेखा कर दिया । साथ ही साथ गृह मंत्रालय भी लेस्बियन संबध को नकार दिया है । जबकि राम दास का कहना है इस तरह के बालिग जोड़ों के खिलाफ धारा ३७७ के तहत मुकदमा दर्ज नहीं किया जाना चाहिए। रामदास ने कहा कि लेस्बियन संबध से एडस जैसे रोगों मे कमी आयेगी । पर क्या भारत में समलैगिकता को स्वीकार करना उचित होगा ? मेरे अनुसार तो नहीं ? आप की क्या राय है ? जरूर बतायें?ब्रिटेन में एक महिला मंत्री ने अपनी समलैंगिक पार्टनर से शादी रचा ली । कोषागार मंत्री ऐंजला ईगल हाउस आफ कामंस की इकलौती घोषित सदस्य है।पर वहां की सभ्यता अलग है हमारे देश से। अब भारत में इस तरह के संबध को मंजूरी कब मिलेगी। पर यह समलैगिक संबध हमारे समाज के रीति रिवाज के बिल्कुल परे हैं । यदि भारत में लेस्बियन संबधों को मंजूरी मिल जाती है। तो हमारे समाज में उथल पुथल सम्भव है ।भारत विश्व के समस्त देशों के अलग हैं। यहां की पंरम्पराये, संस्कृति और रीति रिवाज विश्व के अलग करती है । समलैंगिक क्रांति को भारत अगर स्वीकृति देता है तो यह हमारे समाज में इसका बुरा असर पड़ सकता है । वैसे मेरे अनुसार लेस्बियन संबध भारत जैसे देश के लिए नहीं है । हमारे युवाओं के बेहतरी के लिए समलैंगिकता एक खतरा मात्र है और कुछ नहीं ।

कन्या पूजन -सामाजिक समरसता का अनूठा प्रयोग

दुर्गाष्टमी के दिन कुंवारी कन्याओं के पूजन की परंपरा है जिसमें ब्राह्मण कन्याओं (यदि उपलब्ध हों तो)अथवा अपने आस पास परिचित परिवारों की कन्याओं को पूजन कर ,चरण प्रक्षालन कर भोजन करवाकर दक्षिणा देते हैंदुर्गाष्टमी के अवसर पर सीकर मैं संघ के कार्यकर्ताओं ने एक अनूठा प्रयोग किया .जिसमं सेवा बस्तियों(संघ के कार्यकर्ता तथाकथित दलित या हरिजन बस्ती की जगह सेवा बस्ती शब्द ही काम लेते हैं बस्ती जहां सेवा की आवश्यता है) की कन्याओं को प्रमुख कार्यकर्ताओं के घर कन्या पूजन के लिए आमंत्रित किया.जिसमें मेहतर समाज,गंवारिया ,नट आदि विभिन्न समाजों की करीब 130 कन्याओं का कन्या पूजन किया गया.कार्यक्रम का हेतु ये था कि संघ और सेवा भारती(जिस संस्था से मैं जुङा हूं) मैं काम करते करते कार्यकर्ता बंधुओं के मन मैं छुआछुत जैसी कलुषित सोच खुरच खुरच कर दूर हो जाती है पर कहीं हमारा परिवार हिंदवः सौदराः सर्वे न हिंदु पतितो भवेत् से दूर तो नहीं जा रहा क्या यह संस्कार हमारे घरों की माताओं बहनों तक पहुंचा या नहीं ...या के हिंदु समाज की समरसता की बातें मात्र खाना पूर्ति ही तो नहीं हो रही है ...तो ये सब बातें कार्यकर्ता के घर परिवार तक पहुंचे और धीरे धीरे इन सब चीजों को हम वृहद् रूप मैं कर पायेंगे तो सामाजिक समरसता की बात महात्मा गांधी डा हेडगेवार और श्री मा स गोलवलकर ने सोची थी हम उनको साकार कर पायेंगे.


कार्यक्रम की काफी कुछ जिम्मेदारी मेरी थी क्यों कि ऐसी कुछ बस्तियों मैं मेरा सहज आना जाना है जब बस्ति के प्रमुख युवा लोगों से बात हुइ तो उन्होंनेअपनी स्वीकृति दे दी....पर मेरी आंखों से आंसु निकल पङे जब उनमें से एक लङके ने कहा कि अब तक तुम कहां थे...क्या हम तुम लोगों से कम हिंदु हैं क्या..... खैर सब बच्चियों को नियत समय पर बस मैं लेकर निश्चित घरों मै छोङा और बहां सब कार्यक्रम संपन्न कर वापिस बस्ती मैं छोङा और तब तक हम सब की सांसे अटकी हुई थी कि कहीं कुछ गलत हो गया तो ...........क्यों कि सैंकङों वर्षों की छुआछूत जैसीकुरितियों को आप पलभऱ मैं साफ नहीं कर सकते.


खैर पूरा कार्यक्रम जैसा हम चाहते थे वैसा संपन्न हुआ...शाम को बस्ती मैं दुर्गा पूजा के कार्यक्रम मैं उन्होने फोन कर के मुझे बुलाया मैं जैसे हमेशा जाताहूं बैसे ही पहुंच गया ..पर वही हुआ जो मैं नहीं चाहता था....बस्ती मैं मेरे स्वागत की पूरी तैयारियां थी. माला...भाषण ...अतिथि के द्वारा दो शब्द...कुल मिलाकर सब बङे खुश थे मैं भी और वे भी......


मुझे यूं लगा जैसे बहुत दिनों बाद मैं घर लौटा हूं



09 October 2008

चर्च के कपट सेवा के नाम पर ठगी

ईसाइ मिशनरी इस देश में सेवा के नाम पर ईसाइय द्वारा यहा के भोले-भाले जनता का देशान्तरण कर रही है इस कार्य में तथा कथित बुद्धीजिवी वर्ग का खुला सर्मथन प्राप्त है। बुद्धीजिवी वर्ग इस ओर से आख बन्द किये हुये हैं या बुद्धीजिवी वर्ग को पता नही है कि चर्च के नाम पर इस देश में तरह- तरह के धंधे भी चल रहे हैं। चर्च धर्मान्तरण करने के लिये किसी भी हद तक जा सकता है। चर्च के पादरी अब अपने नाम के पीछे स्वामी शब्द का प्रयोग करते हैं जिससे भोले जनता उन्हें भी किसी हिन्दु साधु या धर्म गुरु समझे और वैसे जनता को आसानी से देशान्तरण के खेल में शामिल किया जा सकता है। झारखण्ड के देवघर में एक चर्च है बाहरी आवरण से किसी भी तरह से चर्च नजर नही आता है और नाम भी शिव जी के नाम पर आश्रम का नाम रखा है लेकिन अगर शिव जी के नाम से अगर कोइ अन्दर चला जाये तो अन्दर घात लगा कर बैढें चर्च के पादरी यैसा झप्पट्टा मारेंगे कि कुछ दिन बाद आप शिव जी को भुल कर कुछ दिन में शिव जी को गाली देना शुरु कर देता है यैसे आश्रम कि सख्या इस देश में कम नही है। वैसे ये सिर्फ आश्रम का नाम ही नही बदलतें है। ये अपना उजला चोला उतार कर गेरुआ वस्त्र और तुलसी माला और रुद्राक्ष भी धारण कर के अपने आपको हिन्दु धर्मगुरु दिखाने का कोशीश करते है। प्रयागराज इलाहाबाद में यैसा एक चर्च है और उसका पादरी जो गेरुआ चोला और रुद्राक्ष पहन कर नंगा नाच करता है आप कभी भी जा कर इस बहुरुपिये से मिल सकतें है जो हिन्दु धर्म का सहारा ले कर हिन्दुस्थान को कमजोर करने में जुटा है। मिशनरी के पादरी सिर्फ कपडा़ बदल कर ही धंधा नही करता है ये दिल्ली जैसे माहानगर में सुन्दर और सेक्सी लड़किया भी मैदान में उतार रखा है जो काँलेज के और जवान लड़को को अपने मोहपास में फँसाती है और अपने रुप सैन्दर्य या फिर जरुरी परा तो सेक्स के द्वारा भी ये आपको फसाँने का कोशीश करेंती हैं। यैसी लडंकिया आपको बस, मेट्रो या किसी भी पब्लिक बाले जगह में अपने ग्राहक तालास करती दिख जाती है जो लड़कों को समय आ फिर किसी कालेज का पता पुछने के बाद ये इतनी ज्यादा घुल मिल जाती हैं कि ये 1-2 दिन के अन्दर सिनेमा हाल, माल या पार्क में डेटिग के रुप में मिलतें है ये डेटिग को ये कामोतेजक बनाती है जिससे की नैजवान लड़का कही भी चलने को तैयार हो जाये। फिर 1 सप्ताह उस लड़के सामने धर्म बदलने का प्रस्ताव रख कर फिर ये किसी नये को खोजने के लिये निकल पडती है।
मिशनरी के द्वारा धर्मान्तरण इस देश पर कितना भारी पर रहा है हमें अब अपने आखों से देख लेना चाहिये। नागालैण्ड में मिशनरी ने जब वहा कि जनता का अच्छी तरह धर्मान्तरण कर दिया तो ग्रेटर नागालैण्ड नामक अलग देश का मांग किया जा रहा है और इसके लिये चर्च ने हथियार के साथ तैयारी कर रखी है।
चर्च के पादरी चर्च के परदे के पिछे क्या क्या गुल खिलाते है हम सभी को पता है जैसे नावालिक लडकियों का यौन शोषण, पादरी चर्च में आने बाली लडकियों के साथ अवैध यौन सबन्ध बनाते रहतें है ये बात हम सभी को पता है। लेकिन सेवा के नाम पर चर्च भेले भाले गरीब जो अपने परिवार के रोटी के लिये जी तोड़ मेहनत करके अपने परिवार और बच्चो का पेट पालतें है और उसी पैसा में से कुछ पैसा बचा कर अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिये बचाता है जिस से अपने बच्चों को पढा़ लिखा करे अच्छा इन्सान बना सके यैसे गरीब आदिवासियों के पैसे पर भी इन मिशनरी का नजर पर गया है अभी कुछ दिन पहले रांची के पास दुमका का घटना है गुड सेफर्ड नामक मिशनरी जो आदिवासियों के बीच में नि:शुल्क शिक्षा, रहने के लिये आवास, मुफ्त पुस्तक और भोजन के नाम पर आदिवासी का पंजीयन कराने के नाम पंजीयन शुल्क 1750 रुपये आदिवासियों से लिया गया और जब पंजीयन के द्वारा जब अच्छा खासा पैसा इक्कठा हो गया तो मौका देख कर गुड सेफर्ड मिशनरी आदिवासियों का पैसा ले कर रफुचक्कर हो गया। जब यहा के गरीब परिवार के द्वरा मिशनरी का खोज खबर लिया गया तो पता चला कि उस क्षेत्र के हजारों आदमी का पैसा ले कर गुड सेफर्ड मिशनरी भाग गया। पुलिस ने मिशनरी के पादरी जोसेफ बोदरा के खिलाफ प्राथमिकता दर्ज कर लिया है।

07 October 2008

मजहब उन्हें सिखाता है आपस में बैर करना

उडी़सा में जन्माष्टमी से ठीक पहले स्वामी श्री लक्ष्मणान्द सरस्वती को ईसाई मिशनरियों के सर्मथकों ने मौत के घाट दिया मसीही धर्मावलम्बी आजादी के पहले गरीब हिन्दुओं का धर्मान्तरण कर रही है। कुछ दिन पहले तक ईसाई मिशनरि का कहना था कि वो धर्मान्तरण नही करते हैं । लेकिन पर्दे के पिछे धर्मान्तरण का गंदा खेल चलता रहता था लेकिन अब हालात खुछ बदल गयें है देश के दलालों का साथ मिलने से अब ईसाई मिशनरियों अब खुल कर कहती है कि हिन्दु का धर्मान्तरण ईसाई मिशनरि करती है और तर्क के अनुसार इसे धर्मान्तरण नही हिन्दुओं का ह्रदय परिवर्तन कहती है। हृदय-परिवर्तन कर रहे हैं, उन्हें बेहतर इन्सान बना रहे हैं। लेकिन क्या ईसाई धर्म ग्रहण कर लेने के बाद क्या कोई आदमी इन्सान बन सकता है क्या बाइबिल में इन्सान बनाने बाले श्लोक हैं जो वेद में है|

बाइबिल यूहन्ना 6:53 में लिखा है

यीशू ने उनसे कहा: 
मैं तुमसे सच सच कहता हूं जब तक तुम मनुष्य मे पुत्र का मांस न खाओ,
और उसका लहू न पीओ, तुममें जीवन ही नही है।

Then Jesus said unto them, Verily, verily, 
I say unto you, Except ye eat the flesh of 
the Son of man, and drink his blood, 
ye have no life in you.

इन्सान को मार कर उसको खाना लहू पीना ये ईसाई धर्म है|

यशायाह 13:15/16
(जो यहोबा को न माने) वह तलवार से मार डाला जाएगा। 
उनके बाल बच्चे उनके सामने पटक दिये जाएंगे और
घर लूटे जाएंगे उनकी स्त्रियों से बलात्कार किया जाएगा।
किसी का घर लुटना स्त्रियों से बलात्कार करने को धर्म कहते हैं।

मत्ती 10 :34 से 38 तक में लिखा है।
 मैं धरती पर एक आग भड़काने आया हूँ। मेरी कितनी इच्छा है कि वह कदाचित् अभी तक भड़क उठती। मेरे पास एक बपतिस्मा है जो मुझे लेना है जब तक यह पूरा नहीं हो जाता, मैं कितना व्याकुल हूँ।  तुम क्या सोचते हो मैं इस धरती पर शान्ति स्थापित करने के लिये आया हूँ? नहीं, मैं तुम्हें बताता हूँ, मैं तो विभाजन करने आया हूँ। 
क्योंकि अब से आगे एक घर के पाँच आदसी एक दूसरे के विरुद्ध बट जायेंगे। तीन दो के विरोध में और दो तीन के विरोध में हो जायेंगे। 53 पिता पुत्र के विरोध में, और पुत्र पिता के विरोध में, माँ बेटी के विरोध में, और बेटी माँ के विरोध में, सास, बहू के विरोध में और बहू सास के विरोध में हो जायेंगी।"

क्या ये धर्म है और इसे पालन कर क्या मनुष्य इंसान बन सकता है शायद कभी नही ठीक इसके विपरीत हिन्दु धर्मसर्वे भवन्तु सुखिन्: । वसु धैवकुटुम्बकम पराई स्त्री को माता, बहन, बेटी समझना। आज इन्सानियत कही बचा है तो सिर्फ हिन्दु धर्म में जो ना तो जिहाद का बात करता है और धर्मान्तरण का| आखिर कन्धमाल की वस्तुस्थिती के बारे में हमें जानना चाहिये। कंधमाल जिला में ज्यादा जनसंख्या कंध जनजाति और दलित जाति के लोग रहते हैं। ईसाई मिशनरियों का नजर इन पर 1827 में परा और ईसाई मिशनरियों सबसे पहले कंधमाल क घुमसर में डेरा डाला। धीरे - धीरे ईसाई मिशनरियों समाजिक सुधार कार्य के आड़ में दलित जाति के गरीबों का धर्मान्तरण किया। 2001 के जनगणना के अनुसार कंधमाल जिले के कुल आबादी 6,47,000 है जिसमें से 1,20,2000 से ज्यादा धर्मांतरित ईसाई हैं। 1894 में दिगी में सबसे पहला चर्च बना और आज 1014 से ज्यादा चर्च हैं जो धर्मांन्तरण के कार्य में लगे हैं। 
                                                                              सरकार को चाहिये वोट नीति को छोड़ देश हित में ईसाई मिशनरियों के अनैतिक कार्य को जल्दी से जल्दी बन्द कराये। स्वामी लक्ष्मणानन्द सरस्वती के हत्यारों को सजा दिलवाये। और ईसाई मिशनरियों के अनैतिक गतीविधीयों पर लगाम लगा कर देशहित में कुछ काम करे।