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TARUN JOSHI "NARAD"

हाल हीं मैं वर्ली सी लिंक के उद्घाटन के बाद कांग्रेस के मुख्यमंत्री तक ने जिस तरह का व्यवहार अमिताभ जैसे सितारे के साथ किया है वो क्या फासीवादी चरित्र का एक नायाब नमूना नहीं है……इसे दोनों ही संदर्भों मैं देखा जा सकता है….एक तो हमारे भोंदू युवराज से मित्रता के चलते शाहरूख खान की फिल्म के रिलीज के लिए पूरा सरकारी तंत्र यूं लग जाता है जैसे बंबई पर हमला होने वाला है…..(इस मौके का फायदा उठाकर भले ही आतंकवादी कहीं ओर अपना काम अंजाम दे जाते है)….वहीं सदी के निर्विवाद सितारे को बदनाम करने की पूरी चेष्टा कांग्रेस द्वारा की जा रही है…..
दूसरी ओर अमिताभ बच्चन का अपमान इसलिए किया जा रहा है कि उन्होने गुजरात का ब्रांड एंबेसडर बनना स्वीकार किया….क्या गुजरात पाकिस्तान का हिस्सा है…..क्या गुजरात मैं सरकारी तंत्र भ्रष्ट है…..क्या गुजरात मैं रोजाना भारत विरोधी प्रदर्शन होते हैं……क्या गुजरात मैं चुनी हुई सरकार नहीं है……देश के आजाद होने के बाद से इस तरह की अस्पृश्यता की फासीवादी मिसाल कहीं भी नहीं मिलेगी……कांग्रेस ने जितनी झख गुजरात के चुनाव के दौरान मारी इतनी और भी मारे तो भी देश और विशेष कर गुजरात की जनता इस तरह के कृत्यों को माफ नहीं करती है…….यदि गुजरात के मुख्यमंत्री को सांप्रदायिक माना जा रहा है तो बरेली के दंगों के दौरान मुख्यमंत्री के संदिग्ध चरित्र के बारे मैं कांग्रैस क्यों नहीं बोल रही है…..कुल मिलाकर देश की जनता के सामने कांग्रेस की ये घृणा की राजनीति धीरे धीरे सामने आ रही है…….पर हिंदुस्तान के लोकतंत्र की सरकार चलाने वाली पार्टी का ये चरित्र निश्चित ही दौगला है……
अभिषेक बच्चन को अर्थ आवर कार्यक्रम से अलग करना तो कांग्रेस के फासीवादी चरित्र की पराकाष्ठा है……..राजनैतिक अस्पृश्यता की ये अलोकतांत्रिक चाल कांग्रेस को भले ही मुस्लिम कठमुल्लाओं के वोट बैंक पर तो भले ही काबिज करवा दे पर निश्चित रूप से देश की लोगतांत्रिक व्यवस्था को इससे बहुत नुकसान होने वाला है…….कांग्रेस की इस तरह की हरकतों के बाद तो मायावती की माला और मूर्तियां सब सही लगने लगी हैं……शायद भारतीय राजनीति की यही दशा अब होने वाली है…..
बाटला हाऊस एनकाऊंटर मैं मारे गये दो आतंकवादियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद से हमारा 6M मीडिया खूब चिल्ल पौं मचाये हुए हे कि और जिसका आधार उन्होने बनाया है कि पोस्ट मार्टम रिपोर्ट मैं ये लिखा हुआ हे कि उन शबों पर ब्लंट औब्जैक्ट से चोट के निशान भी पाये गये हैं…..और इस वजह से सब जोर शोर से इसे एक झूठा एन कांऊंटर बताने मैं लगे हुए हं
यहां कुछ चीजें जो हमारे भी जैहन मैं आई ये ये रिपोर्ट मैं देखकर जो कि हमारे एक मित्र ने यहां छापी है…..कुछ चीजें है जो थोङा सोचने पर आप को मजबूर करेंगी ……..
क्या किसी भी एनकाऊंटर का मीनू फिक्स होता है क्या कि इतनी गोलियां चलानी है….किस किस हथियार से चलानी है…..बंदूक के बट की मारनी है या नहीं….कुल मिलाकर जिस रिपोर्ट को पढकर ऐसी राय जिस किसी ने भी बनाई है….. उसमें कहीं भी ये साबित नहीं होता है कि वो एक फैक एनकाऊंटर था…..ये एक सामान्य सी बात है कि जब कोई हथियार बंद व्यक्ति से पुलिस की मुठभेङ हो रही है तो कोई भी पुलिस वाला अपना कम से कम नुकसान होते हुए सामने वाले को अधिक से अधिक नुकसान हो ऐसा प्रयास करता है….हां उसमें सामान्य तौर पर ये प्रयास जरूर किया जायेगा कि सामने वाले को भी जिंदा पकङा जाये….….सीधी सी बात है कि सुरक्षा बल उनसे अधिक से अधिक जानकारी हासिल करना चाहेंगे…और वे ये भी जानते हैं कि हमारे सैक्यूलर मित्र उनकी तरफ गिदध दृष् गङाये हुए हैं कि ऐसी किसी मुठभेङ मैं कोई गलती हो और हम उनको कठघरे मैं खङे करें……उन आतंकवादियों का पता नहीं पर जो पुलिस अधिकारी वहां कर्तव्य पालन करते हुए शहीद हुआ वो अनेक बार इस तरह की घटनाओं को सफलता पूर्वक झेल चुका था….
हमें ये नहीं भूलना चाहिये कि बाटला हाऊस की इस मुठभेढ मैं एक जांबाज पुलिस अधिकारी शहीद हुआ….उन दो मासूम छात्रों ने पुलिस को देखकर एक प्रशिक्षित व्यक्ति कि तरह अंधाधुंध फायरिंग की वो फायरिंग किसी कलम से नहीं निकल रही थी बल्कि उनके पास आधुनिक हधियार थे……अब तो जामिया मिलिया वाले बतांयेंगे कि वो ऐसी क्या पढाई करवा रहे थे कि उनको इन हथियारों की दरकार पङी….और उनको ये नफासत भरा प्रशिक्षण कहां से मिला…और जहां दनादन गोलियां चल रही हों वहां ये कौन निश्चित करेगा कि हमें कितनी और कब गोलियां चलानी हैं……जयपुर मैं हुए बम विस्फोट का जो हाल ही मैं जो आरोपी पकङा गया है उसने भी स्वीकार किया है कि वो भी बाटला हाऊस मैं ही रुका था……जो ये साबित करता है कि बाटला हाऊस मैं आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह औऱ हर तरह की सहायता मिलती थी…..
कुल मिलाकर इस रिपोर्ट मैं ऐसा कुछ भी नहीं कि इसके लिए इन लोगों को इतना खुश होने की जरूरत हो…..हां इतना जरूर है कि इस तरह चिल्लाने से कुछ लोग जरूर औऱ गुमराह होंगे…… मार्क्स मुल्ला और माईनो से दबा हुये हमारे शर्म निरपेक्ष मीडिया ने एक शहीदकी शहादत पर कीचङ जो उछाला है वो इनकी नालायकी का गंदा नमुना है……
पर फिर भी ये यक्ष प्रश्न अभी बी वहां खङा हुआ है…….कि वे दो भोले भाले निरीह छात्र बंदुकों के साथ बाटला हाऊस मैं क्या अक्कङ –बक्कङ खेल रहे थे…….हो सकता है अगली बार ये शगुफा भी छोङा जाये कि इंस्पेक्टर शर्मा हार्ट अटैक से मरे जो उनको गोलियों की आवाज सुनने से हो गया था……या के उनके खुद के साथियों ने उनको गोली मार दी…… क्यों कि हमारा शर्म निरपेक्ष मीडिया कुछ भी उङा सकता है….