10 May 2008

नही मिलेगा उड़न खटोला, बंगले की बात मत करना

आज खबर मिली की भारत के माननीय मुख्‍य न्‍यायधीश को महामहीम राष्‍ट्रपति जी की तरह विमान नही मिलेगा। क्यों याचिका खारिज कर दी गई, अच्‍छा ही हुआ नही तो कल को राष्‍ट्रपति भवन जैसे भवन की भी मॉंग होने लगती तो दूसरा राष्‍ट्रपति भवन कहॉं से लाया जाता ? :)

एक बात तो स्‍पष्‍ट है कि इस तरह की फिजूल की याचिकाओं पर रोक लगनी चाहिये नही तो कोई न्‍यायधीश तो कोई किसी के नाम पर याचिका लेकर चला आता है। जब भारतीय संसद खुद इतनी मेहबान रहती है तो भारतीयों को किसी प्रकार की चिन्‍ता नही करनी चाहिये। सरकार को जितनी चिंता आम आदमी की नही होती है उतनी अधिक अधिकारियों की होती है, और समय समय पर वह नियमों को फेरबदल कर सुविधा लेते देते रहते है।

निश्चित रूप से यह एक अच्‍छा फैसला है।

फिर मिलना होगा ..... 

09 May 2008

1857 क्रांति की 150 वी वर्ष गाँठ आज - लोकगीतों मे आजादी की कहानी

1857 क्रांति की 150 वी वर्ष गाँठ आज - लोकगीतों मे आजादी की कहानी


1857 एक महज आकडा ही नही बल्कि उसमे देश प्रेम का जबरजस्त जज्बा समाया हुआ है जो हमे स्वयं की आजादी को बनाये रखने के लिए सब कुछ न्योछावर कर देने की प्रेरणा देता है . डेढ़ सौ वर्ष पूर्व आजादी का बिगुल बजाने वाले बहुत से लोगो को इतिहास ने याद रखा ......बहुतो को भुला दिया गया .

आज 1857 क्रांति की 150 वी वर्षगाँठ है आज 10 मई को ठीक 18.57 बजे पर देश के लिए अपने प्राणों का न्योछावर कर देने वाले शहीदों की स्मृति मे उनको याद करते हुए एक दीपक प्रज्ज्वलित कर दो मिनिट का मौन रखकर उन्हें विनम्र श्रध्दा सुमन अर्पित किए जावेंगे यह सभी भारत वासियो का पुनीत कर्तव्य है हम शहीदों को याद कर उनके प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन करे.

संस्काराधानी जबलपुर मे विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा शहीदों की स्मृति मे अनेको कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है आज गली गली चौराहों मे शहीदों की स्मृति मे दीप जलाये जावेंगे और दो मिनिट का सामूहिक मौन रखा जावेगा . धन्य है संस्कार नगरी जो आज अपने देश शहीदों को याद कर इस पुनीत अभियान मे अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेगी .

शहीदों को याद करने और उनको स्मृति मे बनाये रखने मे लोकगीतों की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका रही है . जबलपुर शहर मे एक ऐसे भी दीवाने है जिन्होंने तीन दशकों के लोकगीतों का संग्रह किया है . उन लोकगीतों मे आजादी की कहानी समाहित है .
श्री द्वारका गुप्त "गुप्तेस" जाने माने कवि है और मध्यप्रदेश राज्य विधुत मंडल जबलपुर मे कार्यरत है लेकिन लोकगीतों से उनका पुराना प्रेम है उनके इस संग्रह मे सन् 1857 से 1947 तक के बुन्देली 160 लोकगीतों का संग्रह है और इन गीतों मे स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास समाहित है . सामाजिक रीति संस्कार और तीज त्यौहार पर लोकगीतों का उल्लेख हर जगह मिलता है पर राष्ट्रिय भावनाओ से ओतप्रोत लोकगीतों का संग्रह कही मिलता नही था बस इसी को लेकर प्रेरणा प्राप्त हुई और श्री गुप्त द्वारा जनभावानाओ के अनुरूप बुन्देलाखंडी लोकगीतों का संग्रह करना शुरू किया गया और उन्होंने उसे मूर्त रूप भी दिया . इस बात से इनकार नही किया जा सकता कि लोकगीत किसी घटना के प्रति जनमानस के जेहन मे महत्वपूर्ण बड़ी भूमिका बनाने लोकगीत अब आज के युग मे गुम होते जा रहे है .

लोकगीत किसी घटना के प्रति किसी इतिहासकार का नजरिया नही होते है पर जनभावनाओ की भावनाओं से ओतप्रोत होते है . उनके संग्रह मे खूब लड़ी मर्दानी वो झासी वाली रानी थी .संतावन मे खूब धूम मचाई . संग्रह मे राजा मर्दनसिह बुंदेला, महारानी लक्ष्मी बाई , दुर्गावती पर आधारित कई लोकगीतों का संकलन किया गया है . ऐसे काम विरले लोग ही करना पसंद करते है .इस काम को करने जानने के लिए मध्यप्रदेश के सभी जिलो का भ्रमण कर लोकगीतों का संग्रह किया है और जो काम श्री गुप्त ने कर दिखाया है वे सराहना के पात्र है जिससे संस्कारधानी जबलपुर भी गौरवान्वित हुआ है .

"विवाह में बाधा न डालें किंतु बाल विवाह न होनें दें...!"

हमारे आपके सामने हो जाते हैं बाल विवाह और हम आप हैं कि कन्यादान में बाधा न डालने के धर्म भीरू संकल्प को लेकर खामोश रहतें हैं।हमारी यही भीरू प्रवृत्ति से सामाजिक स्वास्थ्य एवम सामाजिक सूचकों को नकारात्मकता दिशा देतें है । समाज को बदलने का दम भरती हमारी सोच खतरे को भांप हमारी आँखें बंद करने को मज़बूर कर देतीं है। हममें और उन कबूतरों के बीच कोई फर्क नहीं रह जाता जो बिल्ली को देख आँखें बंद कर लेतें है। कबूतरी वृत्ति से निजात मिले इस लिए ज़रूरी है कि हम साहसियों के किस्से जानें ।"दो बरस पहले जबलपुर केंट क्षेत्र मानेगांव की इक आँगनवाड़ी वर्कर अनिता विनोदिया ने बताया कि सरोज नामक बालिका की शादी होने जा रही है। लड़की 17, बरस की है....!काउंसलिंग का दौर चला , पिता की एक न चली , माँ बेटी के साहस ने झुका दिए,बेदम विश्वासों के ध्वज, जीत गए संकल्प पर्यवेक्षक कुमारी माया मिश्रा के, उनकी सहयोगिनी आँगन वाड़ी कार्य कर्ता श्रीमती विनोदिया के।उधर मुझे उस बालिका का सम्मान जो करने की अभिलाषा थी , सो उसके नाम पर"सरोज स्वसहायता समूह " गठन कर दिया एक सिलाई मशीन , शार्ट टर्म ट्रेनिंग कोर्स हुए किशोरियों के लिए । हरनीत जो ताज़ा ही लौटीं थी मलेशिया से।खूब उत्साह से हरनीत दीदी की क्लास में आयीं बेटियाँ। अभी भी इंतज़ार रहता है माने गाँव को जिनका। *******************दयानंद गिरी मोहास से मेरे सेल पर पूछ रहे थे -"काय साहब , सम्भव हो .....!"मेरा रुख इस बात पर सख्त था सो मैंने गिरी जी को दो टूक शब्दों में कह दिया:- "भाई साहब , चार माह बाद ही , शादी कर ने को कहिये अपने नौकर को । "बात असरदार रही गिरि जी ने अपने नौकर से कहां :-"साहब,नहीं मान रहे भैया बिटिया को बियाह चार महीने बाद करियो " गिरी जी का नौकर जालंधर काछी पुत्र हेमराज काछी ने अपनी बिटिया की शादी रोक दी थी चार माह के लिए, बिटिया १८ वर्ष की उम्र पूर्ण करने के सात माह बाद ससुराल गयी।
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बाराती-घराती भी जाएंगे जेल ... इस बात की जान कारी जिनको नहीं है ऐसे लोगों में शुमार हैं बरेला निवासी आनंद और प्रीती शर्मा। जबलपुर के नज़दीक का कस्बे बरेला के इस परिवार की बिटिया दुर्गा १६ साल की है। ०८/०५/०८ रात मनीष भाई ने बताया :-"पुलिस कंट्रोल रूम आपको बरेला में बाल विवाह रोकने के लिए "
रात ८:०० बजे , निचले स्तर पे खोज बीन हुयी । पता चला कि प्रोबेशनर आई पी एस रूचि श्रीवास्तव टी आई साहिबा को फोन पर मिली ख़बर से पता चला कि वार्ड न ० ११ में कम उम्र की बालिका की शादी की जा रही है, पुलिस अमला भेजा गया, आँगनवाड़ी-कार्यकर्ता सूना चक्रवर्ती ने दोपहर उस परिवार को भेंट देकर बता दिया था कि दुर्गा की शादी उस के लिए शारीरिक,सामाजिक,और कानूनी तौर पर कितनी हानि पहुंचा सकती है,यदि दुर्गा १८ बरस के बाद बिहाई जाए तो कितनी सरकारी मदद भी मिलेगी । समझाइश और कानूनी कार्यवाई के आसन्न खतरे को भांप परिवार गहन मंत्रणा में जुट गया। शाम तक आँगनवाड़ी कार्य कर्ताओं का इक और दल जिसमे शारदेश नंदनी जैन,प्रेम लता मिश्रा [आँगनवाड़ी-वर्कर]शामिल थीं , भाई महेन्द्र जैन, जनपद के उपाद्यक्ष सभी ने पूरी ताक़त लगा के परिवार को राजी कर ही लिया । दुर्गा से शादी कर बरात लेकर आने वाले दूल्हे को वापस लौटना ही पड़ा ।समाज से सरोकार रखने वाले मेरे विभाग , की इन कार्यकर्ताओं की जितनी भी सराहना की जाए कम होगी।
इस पोस्‍ट का औचित्‍य समझ में नही आया, इसलिये उक्‍त समग्री हटाई जा रही है।

ब्‍लाग प्रमुख

08 May 2008

अर्थशास्‍त्र की विषय सामग्री - उपभोग

अर्थशास्‍त्र को प्रो. मार्शल ने अध्‍ययन की दृष्टि से उपभोग, उत्‍पादन, विनिमय,  और वितरण सहित 4 भागों में बॉंटा है, जबकि प्रो. चैपमैन इसमें संसोधन करते हुऐ राजस्‍व की एक श्रेणी और बना देते है। उपरोक्‍त वर्णित पॉंचों के बारे में हम विस्‍तार से चर्चा करेगें।

 

उपभोग ( Consumption)

उपभोग मानव की वह आर्थिक होती है जिसमें मनुष्‍य की आवाश्‍यकताओं की संतुष्टि होती है। संक्षेप में हम जब कोई मनुष्य किसी आर्थिक वस्‍तुओं तथा सेवाओं के द्वारा संतुष्टि को प्राप्‍त करता है तो कहा जाता है उक्‍त वस्‍तु या सेवा का उपभोग हुआ। तथा उस वस्‍तु तथा सेवा से मिलने वाली संतुष्टि को उपयोगिता कहते है। उपभोग मनुष्‍य क्रियाओं का आदि और अंत सभी है। उपभोग अपनी अवस्‍था के अनुसार कई प्रकार के हो सकते है, चाहे वह खाद्य पदार्थ के रूप मे चाहे भौतिक सुख सुविधाओं के द्वारा प्राप्‍त उपभोग।

 

डाक्‍टर पी. बसु उपभोग की परिभाषा देते हुए कहते है - ''अर्थशास्‍त्र में आर्थिक उपयोग ही उपभोग है। ''  

 

नोट - अगले अंक में हम उत्‍पादन ( production)  के बारे में चर्चा करेंगें।

06 May 2008

क्‍या खूब कही

युवराज के चारों ओर चापलूसों का जमघट लगा रहता है और यदि वे किसी से नाराज़ हों तो उस व्यक्ति को परेशानी उठानी पड़ती है - अखिलेश दास, पूर्व केन्‍द्रीय मंत्री, जो हाल में ही कांग्रेस से इस्‍तीफा दे चुके है।

04 May 2008

राज ठाकरे का ज़हर

पिछले दिनों आप सबों ने मराठी- उत्तर भारतीय विवाद के बारे में सुना और पढ़ा होगा। केन्द्र में था एक ऐसा राजनीतिज्ञ जो लोकप्रिय होना चाहता था, यानि कि राज ठाकरे।और इसके लिए उसने एक बहुत ही गन्दी चाल चली, लोगों को मराठी- गैर मराठी में बांटने की।

अब सुनिए मेरा यात्रा वृतांत-
मैं अभी २७ से ३० अप्रिल तक मुम्बई में ही था, एक साक्षात्कार के सिलसिले में।साक्षात्कार २८ को हो गया, अतः हमारे पास २ दिन थे मुम्बई के दर्शनीय स्थलों का भ्रमण करने को।

इसी दौरान २९ अप्रैल को मुझे कुछ समय दादर स्टेशन पर बिताने को मिला, वास्तव में मैं अपने दोस्तों के साथ वहाँ रेल का इंतज़ार कर रहा था।हमसब को भूख लग आई थी, अतः हमने सोचा कि कुछ खाते हैं वहाँ लगे स्टाल पर। वहाँ जाकर हमने तीन वडापाओ आर्डर किया और खाने का लुत्फ़ उठाने लगे।

वहीं एक और शख्स वडा पाओ खा रहा था।उसने कुछ और पाओ का आर्डर दिया। आर्डर मिलने पर वो अपना खाना पूरा करने लगा, उसी समय उसने अपनी थाली, जिसमे वो खाना खा रहा था, से एक पाओ स्टाल पर वापस करना चाहा। स्टाल के मालिक ने वापस करने से मना कर दिया क्यूंकि जूठी थाली से खाद्य सामग्री वापस नही होती।
अब ये शख्स चिल्लाने लगा और कहने लगा-
"राज ठाकरे तुम भइया लोगों के साथ ठीक करता है, जब वो तुम लोगों की गा********** (एक बहुत ही गन्दी गाली) करता है।तू क्यों नही लौटाएगा, अब तो मैं तेरे को एक रुपया भी नही देने वाला इस खाने का, और अगर तू ज्यादा बोलेगा तो यहीं थोरी देर में आकार तेरे को मार डालूँगा और तेरा सबकुछ छीन लूँगा।"

मेरा तो ये सुनकर खून खौलने लगा, और मैंने सोचा की मैं यहाँ कुछ बोलूं, पर मेरे दोस्त जो मेरे साथ थे उन्होंने मुझे इशारे से चुप रहने को कहा। बाद में मैंने बात समझी, की अगर मैं वहाँ कुछ बोलता भी, तो घाटा उस स्टाल के मालिक को होती जो शायद मारा जाता या लूट लिया जाता। स्टाल का मालिक, जो उत्तर प्रदेश या बिहार का लगता था, घबरा गया और कुछ देर बाद वो शख्स जो अपने को मराठी कहता था, बिना पैसे दिए वहाँ से गायब हो गया।

पता नही इस ज़हर को रोकने के लिए देश की सर्वोच्च अदालत कब आगे आयेगी और ऐसे ज़हर का इलाज करेगी, क्यूंकि इस ज़हर का इलाज राजनेता तो करने से रहे।कृपया कर माध्यम से आप सब इस ज़हर को फैलाने वालों, और इस ज़हर के ख़िलाफ़ अपनी राय लोगों तक पहुंचाएं, शायद कहीं किसी सही कान तक आवाज़ पहुँच जाए और ये सब ख़त्म हो जाए भारत से, अन्यथा भारत को टूटने में देर नही लगेगी।

02 May 2008

मीडिया की चाटुक‍ारिता रूप

आज रवीश जी के कस्‍बे पर एक  एक लेख पढ़ा किन्‍तु दु:ख हुआ कि मीडिया आज चटुकारिता में ही विश्‍वास करती है। आज देश में सेवा बस्तियों में संघ के विभिन्‍न संगठनों के द्वारा इतने सेवा कार्य चल रहे है कि यह विश्‍व का सबसे बड़ा सामुद‍ायिक कार्यो  में एक होगा।  कि आज कल के कुछ पत्रकारों को मलाईदार आदमी की मलाई खाने और उनकी कवरेज करने के आ‍दी हो रहे है। यही कारण है कि आज मीडिया गर्त में जा रहा है।

इन सब का कारण स्‍पष्‍ट है कि इनकी कवरेज करने पर फाईफ स्‍टार होटल में फ्री में नश्‍ता पानी की व्‍यवस्‍था होती है और संघी कार्यक्रमों के कवरेज में जमीन पर बैठ कर दलितों के मध्‍य भोजन। तो इन पत्रकारों को काहे न विदेशी  करतब दिखेगा।

जहॉं तक ठाकुरो वाली बात है तो भाड़े की मीडिया के भाड़े के टट्टूओं को अराजक न्‍यूज ही प्रकाशित करनी आती है। अगर मीडिया आपना दायित्‍व समझे और सही अर्थो में समाज में जो अच्‍छे काम हो रहे है उसे उजागर करें तो शायद ही मथुरा जैसी घटना घटे।

01 May 2008

भाजपा के यज्ञदत्‍त शर्मा विजयी

उत्तर प्रदेश विधान परिषद इलाहाबाद-झांसी खण्ड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी डा. यज्ञदत्त शर्मा ने कांटे के संघर्ष में अपने निकटतम प्रतिद्वन्द्वी निर्दलीय प्रत्याशी डा. बाबूलाल तिवारी को 3,224 मतों से शिकस्त देकर हैट्रिक बनाई, जबकि द्वितीय मतों की गणना में पीछा करते-करते इण्डियन जस्टिस पार्टी के इन्द्रेश कुमार सोनकर पांचवें, सपा के मुनेश्वर मिश्र 17 वें व कांग्रेस के प्रदीप कुमार मिश्र 20 वें राउण्ड में ही दौड़ से बाहर हो गये।

प्रथम वरीयता मतों की गणना में भाजपा के डा. यज्ञदत्त शर्मा को 9957, निर्दलीय डा.बाबूलाल तिवारी 7927 व शिक्षक नेता लवकुश कुमार मिश्रा को 4811, कांग्रेस के प्रदीप कुमार मिश्र को 3646, सपा के मुनेश्वर मिश्र को 1316, इण्डियन जस्टिस पार्टी के इन्द्रेश कुमार सोनकर को 116 मतों पर सन्तोष करना पड़ा। निर्दलीय प्रत्याशियों में अमर सिंह राठौर 2043, रामआसरे पटेल 1073, गया प्रसाद पटेल 1508, मुनेश्वर मिश्र 1316, केशव देव त्रिपाठी 1233, शरद श्रीवास्तव 1179 मत हासिल कर सके।

गौर तलब हो कि श्री शर्मा इलाहाबाद के मीरापुर के रहने वाले है, और 2001 तक सेवा समिति विद्यामन्दिर के प्रधानाचार्य रहे है। भाजपा को चारों ओर उत्‍तर प्रदेश में मिल रही हार से उक्‍त जीत से काफी रहत मिली है और निश्चित रूप से नये ऊर्जा का संचार होगा।

एक दीप शहीदों के नाम दो मिनिट मौन (प्रथम स्वातंत्र्य समर १८५७)

आदरणीय बन्धु /साथियो/हिन्दी ब्लॉगर भाई-बहिनों - एक अपील आमंत्रण

भारतीय जीवनी शक्ति और सामर्थ्य की अक्षय परम्परा से हम और सभी परिचित ही है . जब जब सारा देश संकटग्रस्त हुआ अपमानित हुआ तब-तब उन संकटों के प्रतिकार और अपनी गौरव रक्षा के लिए भारतीय जनमानस जाग्रत होकर कटीवध्द हुआ है. १८५७ का स्वतंत्रता संग्राम इसका महत्वपूर्ण उदाहरण है. भारतीय सैनिको और समस्त भारतीय जनता ने उस संग्राम मे जो सहस दिखाया ,जो बलिदान किए वे स्मरणीय है. कितने स्त्री पुरुषो आबाल वृद्धो ने अपनी आहुति दी इसका आंकलन कर पाना सम्भव नही है ..यह वर्ष उस महासंग्राम का 150 वां वर्ष है . 1857 के इस बलिदान -यज्ञ का हम उचित रूप से स्मरण करे और अपनी परम्परा के अनुसार यह हो सकता है .कि सारा देश और विदेशो मे रहने वाले भारतीय कि एक दिन उन बलिदानों की स्मृति और उनके प्रति श्रद्धा अर्पण मे दीप प्रज्जवलित करे और दो मिनिट का मौन बलिदानियो के ह्रदय की आग एवम् उनके संकल्प को चिरस्थायी बना सकेगा .

विनम्र अनुरोध है की 1857 के संघर्ष की स्मृति को संजोने इस राष्ट्रिय अभियान मे आप अपनी सक्रिय भागीदारी करे एवम् इस पवित्र यज्ञ मे अपने तन मन के सहयोग की समिधा अर्पण करने का कष्ट करे . यह कार्यक्रम जबलपुर शहर मे गली-गली- चौराहों मे अलग अलग समूहों मे विशाल स्तर पर आयोजित किया जावेगा . आप से अपील करता हूँ कि आप भी अपने शहरों मे शहीदों के प्रति श्रध्धांजलि अर्पित करे और उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाये रखने के लिए श्रद्धा अर्पण मे दीप प्रज्जवलित करे और इस यज्ञ मे सहभागी बने .

इस राष्ट्र यज्ञ मे आप निम्न आधार पर जुड़ सकते है -

नगर मे विभिन्न चौराहों सार्वजनिक स्थानों एवम् महापुरुषों के प्रतिमा स्थलों पर शहीदों की स्मृति मे कार्यक्रम होना अपेक्षित .
आप भी अपनी पार्टी /संस्थाओं की ओर से किसी सार्वजनिक स्थान का इस कार्यक्रम के लिए चयन कर सकते है .
इस कार्यक्रम मे जनसामान्य सहभागी हो ऐसी अपील समाचार के माध्यम से आप प्रसारित कर सकते है .
मुख्य कार्यक्रम का वातावरण बनने की द्रष्टि से 1857 की स्मृति मे पूरक कार्यक्रम आयोजित कर सकते है .
अपनी संस्था की ओर से प्रचार सामग्री मुद्रित कराके वितरित अथवा प्रदर्शित कर सकते है .

दिनक 10 मई 2008-1857 (सायं 6:50 बजे)

भवदीय
आचार्य कृष्ण कान्त चतुवेदी
एक दीप - दो मिनिट शहीदों के नाम
(प्रथम स्वातंत्र्य समर १८५७)
अभियान समिति,जबलपुर
दूरभाष ०७६१- २४१६९६३ फैक्स- ०७६१-4006608