31 July 2010

इस्लाम एक जीवन पद्धति……

 

इस्लाम न तो धर्म है औऱ न ही संप्रदाय ,इसके पूरे संदर्भ मैं ये एक संपूर्ण 100 प्रतिशत जीवन जीने का एक तरीका है.इस्लाम मैं धार्मिक,कानूनी,राजनीतिक,आर्थिक सामाजिक व सामरिक पहलू है.image

किसी भी देश मैं इस्लामी करण का प्रारंभ होता है जब पर्याप्त मात्रा मैं मुस्लिम जनसंख्या होती है और वे इसके लिए उग्रता दिखाने की स्थिति मैं होते हैं और जब राजनीतिक रूप से जागरूक और सहनशील समाज मुस्रलिमों की कुछ धार्मिक बातों को मान  लेते हैं तब उनकी कुछ और मांगें धीरे से आगे आजाती है…….ये किस तरह काम करता है….                                         उस देश मैं हो जब तक मुस्लिम जनसंख्या 2 प्रतिशत या कम हो तो मुस्लिम समाज एक शांतिप्रिय समाज है जो किसी भी प्रकार से अन्य नागरिकों के लिए खतरा नहीं दिखाई देता है जैसा कि ….

United States -- Muslim 0.6%
Australia -- Muslim 1.5%
Canada -- Muslim 1.9%
China -- Muslim 1.8%
Italy -- Muslim 1.5%
Norway -- Muslim 1.8%

जब ये जनसंख्या 2-5 प्रतिशत तक पहुंच जाती है तब धर्मांतरण प्रारंभ होता है,जो अक्सर अन्य  धर्म के  अल्पसंख्यकों और जैलों मैं अलग थलग पङे लोगों से होता है ….जैसा कि निम्नांकित है…..
Denmark -- Muslim 2%
Germany -- Muslim 3.7%
United Kingdom -- Muslim 2.7%
Spain -- Muslim 4%
Thailand -- Muslim 4.6%

प्रतिशत से ज्यादा होने पर ये अपनी जनसंख्या के अनुपात से ज्याद मांगे रखना शुरु कर देते है……जैसे वे हलाल के मांस की मांग करेंगे एक तरह से जोब सिक्यूरिटी हो गई मुस्लिमों की खाने की इंडस्ट्री मैं…..सुपरमार्केट्स पर हलाल के मांस के अलग स्टाल लगाने का दबाव बनाया जाता है अन्यथा उनके बहिष्कार की धमकियां दी जाती हैजैसा कि निम्न देशों मैं हो रहा है……

France -- Muslim 8%
Philippines -- Muslim 5%
Sweden -- Muslim 5%
Switzerland -- Muslim 4.3%
The Netherlands -- Muslim 5.5%
Trinidad & Tobago -- Muslim 5.8%

और अब समय आता है जब वे सरकार से ऐसे कानून बनाने की बात करते हैं कि उनके ऊपर सिर्फ शरियत लागू की जाये…..क्यों कि मुसलमानों का अंतिम लक्ष्य पूरे विश्व मैं शरियत लागू करना है…..

जब मुस्लिम जनसंख्या 10 प्रतिशत या ज्यादा हो जाती है तो अपनी बनाई हुई  बिगङी हुई परिस्थितियों के लिये आंदोलन करना शुरू करते हैं….और यदि कोई गैर मुसलमान इस्लाम के प्रति असम्मान जताते है तो ये धमकियां देना शुरु कर देते हैं और दंगा भङकाने की कोशिश करते हैं. जैसा कि एम्सटर्डम मैं हुआ जहां मुहम्मद साहब का कार्टून बनाने के बाद धमकियां दी गई……..

Guyana -- Muslim 10%
India -- Muslim 13.4%
Israel -- Muslim 16%
Kenya -- Muslim 10%
Russia -- Muslim 15%

और जब जनसंख्या 20 प्रतिशत या उससे अधिक हो तो छोटी छोटी बात पर दंगा करना….जिहादी ग्रुप बनाना,हत्यायें करना ….मंदिर और चर्च जला देना आम बात हो जाती है जैसा कि ……

Ethiopia -- Muslim 32.8%
At 40%, nations experience widespread massacres, chronic terror attacks, and ongoing militia warfare, such as in:
Bosnia -- Muslim 40%
Chad -- Muslim 53.1%
Lebanon -- Muslim 59.7%

60 प्रतिशत से ऊपर वाली जनसंख्या वाले देशों मैं गैर मुस्लिमों को औऱ अन्य मुस्लिम समुदाय जैसे पाकिस्तान मैं अहमदिया पर स्वायंभू तरीके से मुकदमें चलाकर उन्हें परेशान किया जाता है औऱ एक तरह से उनकी सामुहिक हत्यायें आदि करके उनको खत्म किया जाता है…..औऱ इसके लिए हथियार बनाया जाता है शरिया कानून को औऱ जजिया कर जो कि काफिरों पर लगाया गया टैक्स है कि वे शांति से जी सकें…….जैसा निम्न देशों मैं हो रहा है……

Albania -- Muslim 70%
Malaysia -- Muslim 60.4%
Qatar -- Muslim 77.5%
Sudan -- Muslim 70%

औऱ 80 प्रतिशत के बाद हिंसक जिहाद औऱ हत्यायें रोजमर्रा का काम हो जाता है…..याने राज्य द्वारा प्रायोजित सामुहिक हत्यायें क्यों कि काफिरों को खत्म करना इन देशों की मूल नीति होती हैऔर 100 प्रतिशत मुस्लिम जनसंख्या लक्ष्य जैसा कि निम्न देशों मै हो रहा है….

Egypt -- Muslim 90%
Gaza -- Muslim 98.7%
Indonesia -- Muslim 86.1%
Iran -- Muslim 98%
Iraq -- Muslim 97%
Jordan -- Muslim 92%
Morocco -- Muslim 98.7%
Pakistan -- Muslim 97%
Palestine -- Muslim 99%
Syria -- Muslim 90%
Tajikistan -- Muslim 90%
Turkey -- Muslim 99.8%
United Arab Emirates -- Muslim 96%

और जहां संपूर्ण लक्ष्य प्राप्तकर लिया जाता है वहां दार –ए -सलाम के रूप मैं शांति का प्रवेश होता है…..और वहां पूरी तरह से शांति औऱ शांति ही होनी चाहिये क्यों कि हर व्यक्ति मुसलमान है…..विध्यालयों की जगह सिऱ्फ मदरसे होते हैं औऱ कोरान ही सिर्फ साहित्य होता है……..चारों और इस्लाम का बोलबाला होता है…..सिर्फ कुरान सुनाई देती है जैसा इन देशों मैं हुआ है…….

पर दुर्भाग्य से शांति कभी नहीं आती जैसा कि इन देशों मैं हुआ है…जिनमें बिना किसी अपवाद के सबसे कट्टर मुसलमान रहते हैं और जो अपनी खून की प्यास को थोङे कम कटेटर मुसलमानों के खून से बुझाते हैं…..जिसके अनेक कारण गिनाये जा सकते हैं 

Afghanistan -- Muslim 100%
Saudi Arabia -- Muslim 100%
Somalia -- Muslim 100%
Yemen -- Muslim 100%'

Before I was nine I had learned the basic canon of Arab life. It was me against my brother; me and my brother against our father; my family against my cousins and the clan; the clan against the tribe; the tribe against the world, and all of us against the infidel. -- Leon Uris, 'The Haj'

ये  समझना बहुत ही महत्वपूर्ण है कि जिन देशों मैं मुस्लिम जनसंख्या 100 प्रतिशत से ठीक ठाक कम होती है जैसे फ्रांस जहां अल्पसंख्यक मुस्लिम जनसंख्या अपनी ही बनाई हुई बस्तियों मैं रहती है जहां वे शरियत कानून के अनुसार रहते हैं….जहां पुलिस प्रवेश भी नहीं करती………जहां न पुलिस न न्यायालय न विध्यालय और न हीं गैर मुस्लिमों के लिए कोई धार्मिक सुविधा होती है….ऐसे मैं मुस्लिम समाज के अन्य वर्गों के साथ मिल भी नहीं सकते ……बच्चे मदरसों मैं जाते हैं और केवल कुरान सीखते हैं जिसमें वो जान पाते हैं कि काफिर की सजा केवल मौत है……………

आज

आज 1.5 अरब मुसलमान विश्व की जनसंख्या का 22 प्रतिशत है….पर उनकी जन्म दर ईसाई,हिंदु,बौंद्ध,यहूदी और अन्य सभी धर्मों के मानने वालो से अधिक है…इस सदी के अंत तक मुसलमान विश्व की जनसंख्या के 50 प्रतिशत से ज्यादा होंगे……….

सोचो………और सोचो…………….फिर क्या होगा…..

Adapted from Dr. Peter Hammond's book: Slavery, Terrorism and Islam: The Historical Roots and Contemporary Threat.

ये कुछ डरावने सपने की तरह है…..ये कुछ गंभीर बातें कुछ गंभीर चिंतकों के लिए है……मेरा काम पूरा हुआ अब आप जाने आप इन सब जानकारियों के साथ क्या करने वाले हैं…….

09 June 2010

jai gomata jai gopala.

।। श्री गोभ्यः नमः।।

आनंदवन पथमेड़ा भारत देश की वह पावन व मनोरम भूमि है जिसे भगवान श्री कृश्ण ने कुरूक्षेत्र से द्वारिका जाते समय श्रावण,भादो महिने में रूककर वृन्दावन से लायी हुई भूमण्डल की सर्वाधिक दुधारू,जुझारू,साहसी,शौर्यवान,सौम्यवान,ब्रह्मस्वरूपा गायों के चरने व विचरने के लिए चुना था। गत 12 शताब्दियों से कामधेनु,कपिला,सुरभि की संतान गोवंश पर होेने वाले अत्याचारों को रोकने के लिये सन् 1993 मे राष्ट्रव्यापी रचनात्मक गोसेवा महाभियान का प्रारम्भ इसी स्थान से हुआ है।

जिसके अन्तर्गत सर्वप्रथम श्री गोपाल गोवर्धन गोशाला श्री गोधाम महातीर्थ की स्थापना कर पश्चिमी राजस्थान एवं उतर पश्चिमी गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों में गोसेवा आश्रमों,गोसंरक्षण केन्द्रों तथा गोसेवा शिविरों की स्थापना करना प्रारम्भ किया। इस अभियान द्वारा गोपालक किसानों तथा धर्मात्मा सज्जनों के माध्यम से गोग्रास संग्रहित करके गोसेवा आश्रमों में आश्रित गोवंश के प्राण पोशण का निरन्तर प्रयास प्रारम्भ हुआ। उपरोक्त महाभियान के प्रथम चरण में क्रूर कसाइयों के चंगुल से तथा भयंकर अकाल की पीड़ा से पीड़ित लाखों गोवंश के प्राणों को संरक्षण मिल सका।

श्री गोधाम महातीर्थ की स्थापना से लेकर आजतक अत 17 वर्शो में श्री गोधाम पथमेड़ा द्वारा स्थापित एवं संचालित विभिन्न गोसेवाश्रमों में आश्रय पाने वाले गोवंश की संख्या क्रमशः इस प्रकार रही है-सन् 1993 में 8 गाय से शुभारम्भ,सन् 1999 में 90,000 गोवंश सन् 2000 में 90,700 गोवंश सन् 2001 में 1,26,000 गोवंश,सन् 2003 में 2,84,000 गोवंश सन् 2004 में 54,000 गोवंश, सन् 2005 में 97,000 गोवंश, सन् 2009 में 72,000 हजार इस प्रकार लगातार चलते हुए वर्तमान सन् 2010 में 2,00,000 लाख से अधिक गोवंश सेवा में है, जो की अकाल की विभीशिका के चलते बढ़ता ही जा रहा है। साथ ही प्रदेश के विभिन्न भागों में अस्थाई गोसेवा अकाल राहत शिविरों में लाखों गोवंश को आश्रय देने का कार्य प्रारम्भ हो गया है।

अन्त में ’’ कामधेनु कल्याण परिवार श्री गोधाम पथमेड़ा ’’ भारत की धर्मपरायण जनता से विनम्र प्रार्थना करता है कि श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा प्रायोजित रचनात्मक एवं सृजनात्मक गोसेवा महाभियान में आप सभी तन-मन-धन से पूर्ण सहयोग करके इस सर्व कल्याणकारी कार्य को गति प्रदान करें तथा गोसेवा के महान पुण्य को अवश्यमेव अर्जित करें।

जय गोमाता जय गोपाल।

अधिक जानकारी के लिए देखंे हमारी वेबसाईट http://www.pathmedagodarshan.org

अथवा मेल करें mail@pathmedagodarshan.org

जय गौमाता जय गोपाला।

जय गौमाता जय गोपाला।दोस्तो क्या ये हमारा वही भारत देश हैं जिसे सोने की चिडिया, देवो का देश कहा जाता था। क्या हम जगतगुरू भारत के निवासी हैं। मैं आज ये लिंक प्रस्तुत कर रहा हूं । देखें और निर्णय करें। राम व कृष्ण की धरती भारत में क्या ये कृत्य सही हैं। कृप्या कर क्लिक करेें भारत देश के नाम के अपमान की जीती जागती तस्वीरों पर visit http://picasaweb.google.com/awbikk/SHInspectionPhotos#
और साथ ही साथ इस पर भी क्लिक करें कि भारत देश में उस उपर के कलंक से बचने के लिए भी कुछ हो रहा हैं। इस प्रकार के सेवा के केन्द्रों का सम्मान अवश्य करना चाहिए। कृप्या कर क्लिक करें।भारत देश का गौरव पुनः पाने के केन्द्र के बारे में जानने के लिएvisit http://www.pathmedagodarshan.org/
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तरुण जोशी "नारद"
९४६२२७४५२२, ९२५१९४१९९९, ९८२९९०८३९३,
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11 April 2010

!वो बचपन याद आता है!

आज भी मुझे अपना वो बचपन याद आता है,
खेलते थे जहाँ क्रिकेट, वो आँगन याद आता है..
बचपन के उन यारों को मैं भूला नहीं,
ये सावन के बाद पेड़ों से हट जाने वाला झूला नहीं...

नए खिलोने देख कर, पुराने भूलना याद आता है,
माँ कि लोरियां सुनके सो जाना याद आता है..
वो नानी कि परियों की कहानी मैं अभी भूला नहीं,
भोर में पंछियों का वो चहचहाना याद आता है..

वो शरारतों के बाद, डर जाना याद आता है,
माँ के पहलू में फिर, छुप जाना याद आता है..
वो आँगन की मिटटी की खुशबू अभी भूला नहीं,
ऐसा तो कोई नहीं, जो यादों में झूला नहीं..

वो छोटी छोटी बात पर, रूठ जाना याद आता है,
माँ का तब प्यार से, वो मानना याद आता है...
पापा की प्यार भरी मार अभी भूला नहीं,
आंसुओं में तब गीला होना याद आता है..

बात बात में दोस्तों से हुई लड़ाई याद है मुझे,
फिर ये सब भूल कर ली हर अंगड़ाई याद है मुझे..
वो बचपन की गलियों का हर तराना याद आता है,
दोस्ती का, नाराज़गी का हर फ़साना याद आता है....

06 April 2010

साप्‍तहिक वंदेमातरम् पत्रिका मे - प्रमेन्‍्द्र प्रताप सिंह और मिथलेश दूबे

पाक्षिक पत्रिका वंदेमातरम् के अप्रेल अंक मे दो ब्‍लागरो के आलेक छपे है जिन्‍हे आप बड़ा कर पढ़ सकते है -


30 March 2010

कांग्रेस क्या फासीवाद की फोटो कोपी बन चुकी है…….

हाल हीं मैं वर्ली सी लिंक के उद्घाटन के बाद कांग्रेस के मुख्यमंत्री तक ने जिस तरह का व्यवहार अमिताभ जैसे सितारे के साथ किया है वो क्या फासीवादी चरित्र का एक नायाब नमूना नहीं है……इसे दोनों ही संदर्भों मैं देखा जा सकता है….एक तो हमारे भोंदू युवराज से मित्रता के चलते शाहरूख खान की फिल्म के रिलीज के लिए पूरा सरकारी तंत्र यूं लग जाता है जैसे बंबई पर हमला होने वाला है…..(इस मौके का फायदा उठाकर भले ही आतंकवादी कहीं ओर अपना काम अंजाम दे जाते है)….वहीं सदी के निर्विवाद सितारे को बदनाम करने की पूरी चेष्टा कांग्रेस द्वारा की जा रही है…..

दूसरी ओर अमिताभ बच्चन का अपमान इसलिए किया जा रहा है कि उन्होने गुजरात का ब्रांड एंबेसडर बनना स्वीकार किया….क्या गुजरात पाकिस्तान का हिस्सा है…..क्या गुजरात मैं सरकारी तंत्र भ्रष्ट है…..क्या गुजरात मैं रोजाना भारत विरोधी प्रदर्शन होते हैं……क्या गुजरात मैं चुनी हुई सरकार नहीं है……देश के आजाद होने के बाद से इस तरह की अस्पृश्यता की फासीवादी मिसाल कहीं भी नहीं मिलेगी……कांग्रेस ने जितनी झख गुजरात के चुनाव के दौरान मारी इतनी और भी मारे तो भी देश और विशेष कर गुजरात की जनता इस तरह के कृत्यों को माफ नहीं करती है…….यदि गुजरात के मुख्यमंत्री को सांप्रदायिक माना जा रहा है तो बरेली के दंगों के दौरान मुख्यमंत्री के संदिग्ध चरित्र के बारे मैं कांग्रैस क्यों नहीं बोल रही है…..कुल मिलाकर देश की जनता के सामने कांग्रेस की ये घृणा की राजनीति धीरे धीरे सामने आ रही है…….पर हिंदुस्तान के लोकतंत्र की सरकार चलाने वाली पार्टी का ये चरित्र निश्चित ही दौगला है……

अभिषेक बच्चन को अर्थ आवर कार्यक्रम से अलग करना तो कांग्रेस के फासीवादी चरित्र की पराकाष्ठा है……..राजनैतिक अस्पृश्यता की ये अलोकतांत्रिक चाल कांग्रेस को भले ही मुस्लिम कठमुल्लाओं के वोट बैंक पर तो भले ही काबिज करवा दे पर निश्चित रूप से देश की लोगतांत्रिक व्यवस्था को इससे बहुत नुकसान होने वाला है…….कांग्रेस की इस तरह की हरकतों के बाद तो मायावती की माला और मूर्तियां सब सही लगने लगी हैं……शायद भारतीय राजनीति की यही दशा अब होने वाली है…..

21 March 2010

बाटला हाऊस एनकाऊंटर रिपोर्ट….a 2 million dollar question…..

बाटला हाऊस एनकाऊंटर मैं मारे गये दो आतंकवादियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद से हमारा 6M मीडिया खूब चिल्ल पौं मचाये हुए हे कि और जिसका आधार उन्होने बनाया है कि पोस्ट मार्टम रिपोर्ट मैं ये लिखा हुआ हे कि उन शबों पर ब्लंट औब्जैक्ट से चोट के निशान भी पाये गये हैं…..और इस वजह से सब जोर शोर से इसे एक झूठा एन कांऊंटर बताने मैं लगे हुए हं

यहां कुछ चीजें जो हमारे भी जैहन मैं आई ये ये रिपोर्ट मैं देखकर जो कि हमारे एक मित्र ने यहां छापी है…..कुछ चीजें है जो थोङा सोचने पर आप को मजबूर करेंगी ……..

क्या किसी भी एनकाऊंटर का मीनू फिक्स होता है क्या कि इतनी गोलियां चलानी है….किस किस हथियार से चलानी है…..बंदूक के बट की मारनी है या नहीं….कुल मिलाकर जिस रिपोर्ट को पढकर ऐसी राय जिस किसी ने भी बनाई है….. उसमें कहीं भी ये साबित नहीं होता है कि वो एक फैक एनकाऊंटर था…..ये एक सामान्य सी बात है कि जब कोई हथियार बंद व्यक्ति से पुलिस की मुठभेङ हो रही है तो कोई भी पुलिस वाला अपना कम से कम नुकसान होते हुए सामने वाले को अधिक से अधिक नुकसान हो ऐसा प्रयास करता है….हां उसमें सामान्य तौर पर ये प्रयास जरूर किया जायेगा कि सामने वाले को भी जिंदा पकङा जाये….….सीधी सी बात है कि सुरक्षा बल उनसे अधिक से अधिक जानकारी हासिल करना चाहेंगे…और वे ये भी जानते हैं कि हमारे सैक्यूलर मित्र उनकी तरफ गिदध दृष् गङाये हुए हैं कि ऐसी किसी मुठभेङ मैं कोई गलती हो और हम उनको कठघरे मैं खङे करें……उन आतंकवादियों का पता नहीं पर जो पुलिस अधिकारी वहां कर्तव्य पालन करते हुए शहीद हुआ वो अनेक बार इस तरह की घटनाओं को सफलता पूर्वक झेल चुका था….

हमें ये नहीं भूलना चाहिये कि बाटला हाऊस की इस मुठभेढ मैं एक जांबाज पुलिस अधिकारी शहीद हुआ….उन दो मासूम छात्रों ने पुलिस को देखकर एक प्रशिक्षित व्यक्ति कि तरह अंधाधुंध फायरिंग की वो फायरिंग किसी कलम से नहीं निकल रही थी बल्कि उनके पास आधुनिक हधियार थे……अब तो जामिया मिलिया वाले बतांयेंगे कि वो ऐसी क्या पढाई करवा रहे थे कि उनको इन हथियारों की दरकार पङी….और उनको ये नफासत भरा प्रशिक्षण कहां से मिला…और जहां दनादन गोलियां चल रही हों वहां ये कौन निश्चित करेगा कि हमें कितनी और कब गोलियां चलानी हैं……जयपुर मैं हुए बम विस्फोट का जो हाल ही मैं जो आरोपी पकङा गया है उसने भी स्वीकार किया है कि वो भी बाटला हाऊस मैं ही रुका था……जो ये साबित करता है कि बाटला हाऊस मैं आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह औऱ हर तरह की सहायता मिलती थी…..

कुल मिलाकर इस रिपोर्ट मैं ऐसा कुछ भी नहीं कि इसके लिए इन लोगों को इतना खुश होने की जरूरत हो…..हां इतना जरूर है कि इस तरह चिल्लाने से कुछ लोग जरूर औऱ गुमराह होंगे…… मार्क्स मुल्ला और माईनो से दबा हुये हमारे शर्म निरपेक्ष मीडिया ने एक शहीदकी शहादत पर कीचङ जो उछाला है वो इनकी नालायकी का गंदा नमुना है……

पर फिर भी ये यक्ष प्रश्न अभी बी वहां खङा हुआ है…….कि वे दो भोले भाले निरीह छात्र बंदुकों के साथ बाटला हाऊस मैं क्या अक्कङ –बक्कङ खेल रहे थे…….हो सकता है अगली बार ये शगुफा भी छोङा जाये कि इंस्पेक्टर शर्मा हार्ट अटैक से मरे जो उनको गोलियों की आवाज सुनने से हो गया था……या के उनके खुद के साथियों ने उनको गोली मार दी…… क्यों कि हमारा शर्म निरपेक्ष मीडिया कुछ भी उङा सकता है….

19 March 2010

शहीद - ए - आजम भगत सिंह - 9 - लास्ट part

शहीद - ए - आजम भगत सिंह - 9

मोल नही कुछ मान मुकुट का,
मोल नही कुछ सिंहासन का .
जीवन अर्पित करने आया,
माटी कर्ज़ चुकाने आया .

याचक बन कर मांग रहा हूँ,
तेरा दुख पहचान रहा हूँ .
लाल जो खेला तेरी गोदी,
डाल दे भारत माँ की गोदी .

तेरा तो घर द्वार क्रांति का,
तू जननी है स्रोत क्रांति का .
कोख पे अपनी कर अभिमान,
पाऊँ शहादत, दे वरदान .

एक पूत का गम मत करना,
सब तरुणों को पूत समझना .
जग में तेरा सदा सम्म्मान,
युगों युगों तक रहेगा मान .

खानदान की रीत निभाई,
राह क्रांति की मैने पाई .
दादा, चाचा, पिता कदम पर,
खून खौलता दीन दमन पर .

माता कर दो अब विदा विदा,
हो जाऊँ वतन पर फ़िदा फ़िदा .
रहे अभागे जो सदा सदा,
खुशियाँ हों उनको अदा अदा .

हर तरफ ध्वनित आजाज हुई,
स्वर भगत कण्ठ हर साज हुई .
भगत सिंह घर घर में छाया,
ब्रिटिश राज भी था घबराया .

वायसराय से माफी मांगें,
भगत लिखित में माफी मांगें .
कमी सजा में हो सकती है,
उनको फाँसी रुक सकती है .

देश प्रेम में मर मिट जाना,
स्वीकार नही, क्षमा माँगना .
हमें मृत्यु भय नही दिखाना,
उसको तो है गले लगाना .

हर सपूत में चाह जगाना,
मर मिटने की राह दिखाना .
जब्ती को है तोड़ गिराना,
चिता साम्राज्यवाद जलाना .

जितने दिन भी जेल रहे थे,
जीत मृत्यु को खेल रहे थे .
पूरे जग को प्रेरित करते,
आजादी में जीवन भरते .

आजादी के वह दीवाने,
देश हेतु मर मिटने वाले .
नहीं किसी से डरने वाले,
अंगारों पर चलने वाले .

कल चक्र पहचान लिया था,
दाम मौत का जान लिया था .
हँस हँस जीवन वार दिया था,
आजादी विश्वास दिया था .

अंतिम इच्छा जब पूछी थी,
अनुरति भगत की बस यही थी . (अनुरति = चाहत)
’जन्म यहीं पर फिर हो मेरा,
सेवा - देश धर्म हो मेरा .’

’दिल से न निकलेगी कभी भी,
वतन की उल्फत मर कर भी .
मेरी मिट्टी से आयेगी,
सदा खुशबू-ए-वतन आयेगी .’

क्रांतिवीर से राज्य डरा था,
युग युग चेतन प्राण भरा था .
आंदोलन का खौफ भरा था,
पतन मार्ग पर अधो गिरा था .

चौबीस को जो तय थी फाँसी,
तेईस मार्च दे दी फाँसी .
संध्या साढ़े सात समय था,
बलिदानों का अमर समय था .

पुण्य पर्व बलिदान मनाया,
हँसते हँसते ताल मिलाया .
झूम रहे थे वह मस्ताने,
संघर्ष क्रांति के परवाने .

बारूद बना कर यौवन को,
अर्पित कर के भारत भू को .
फांसी फंदा गले लगाया,
शोलों को घर घर पहुँचाया .

क्रांति की वेदी पर तर्पण,
यौवन फूलॊं सा कर अर्पण .
हँसते हँसते न्यौछावर थे,
जय इंकलाब के नारे थे .

भारत माँ ने कर आलिंगन,
भाल सजाया रक्तिम चंदन .
कण कण में वह व्याप्त हो गया,
भारत उसका ऋणी हो गया .

गीत सोहले संध्या गाये,
मिलन गीत चंदा ने गाये .
तारे भर ले आये घड़ोली,
सजी चांदनी की रंगोली .

देव उठा कर लाये डोली,
बिखरा सुरभित चंदन रोली .
पुण्यात्मा का कर कर वंदन,
लोप परम सत्ता अभिनंदन .

प्रकृति चकित कर रही थी नाज़,
आकाश मगन बना हमराज .
भूला पवन था करना शोर,
सिंधु भी भूल गया था रोर .

लहरों में आज नही हिलोर,
गम में सूरज, नही है भोर .
देव नमन को भू पर आये,
आँधी तूफाँ शीश झुकाये .

अंग्रजों का मन डोल रहा था,
सर चढ़ कर डर बोल रहा था .
मृत शरीर के कर के टुकड़े,
उसी समय बोरों में भरके,

ले फिरोजपुर वहाँ जलाया,
कुछ लोगों को वहाँ जो पाया,
टुकड़े अधजले सतलज फेंक,
नौ दो ग्यारह हुए अंग्रेज .

देखा पास नजारा आकर,
हैरानी थी टुकड़े पाकर .
ग्रामीणों ने किया सत्कार,
विधिवत किया अंतिम संस्कार .

वीर भगत तुम हममें जिंदा,
वीर भगत तुम सबमें जिंदा .
हर देश भक्त में तुम रहोगे,
जिंदा हो ! जिंदा रहोगे !

स्वतंत्रता संग्राम इतिहास,
नाम भगत सिंह ध्रुव आकाश .
नाम अमर है, अमिट रहेगा,
स्वातंत्र्य वीर अक्षुण्ण रहेगा .

आविर्भाव भारत उत्थान,
आलोकित राष्ट्र भक्ति विहान .
भगत सिंह साश्वत योगदान,
भास्कर शौर्य बलिदान महान .

कवि कुलवंत सिंह