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20 March 2008

बुरा न मानो होली है

netaji :- देवदास
पुनीत ओमर : छुपा-रुस्तम,
Varsa Singh : अब क्या मिसाल
Tara Chandra Gupta : तारे चन्द्रमा की वजह से supt
maya :महा ठगनी हम जानी,
अरुण ,क्या बात है...
Kavi Kulwant : आए तो छाए,
राज कुमार : मन भाए मूड न लागे,
anoop : खरपतवार,
TARUN JOSHI "NARAD": नकद,नारायण-नारायण,
मनोज ज़ालिम "प्रलयनाथ" : जालिम लोग ही प्रलय लातें हैं...?
हिन्दु चेतना : जगह न पाए,
तेज़ धार : कर रहा हूँ,
Manvendra Pratap Singh , नाम बडे दर्शन...?
Vishu :बारहवां खिलाड़ी
SWAMEV MRIGENDRATA : झंडा ऊँचा रहे तुम्हारा,
देवेन्‍द्र प्रताप सिंह : प्रेम प्रताप पतियाले वाला,
Suresh Chiplunkar : मुन्ना भाई के सर्किट,बोले तो....?
mahashakti : तेज़ हवाओं से बचने की कोशिश में .
Ruchi Singh : अरुचिकर ब्लॉगर,
मिहिरभोज : कभी किसी रोज़ ,
अभिषेक शर्मा : हया यक लखत आयी और शबाब....आहिस्ता....
रीतेश रंजन : कभी तो मिलेगी,
neeshoo : कोई जब तुम्हारा...तोड़ दे
Abhiraj : अभी,राज़ रहने दो
आशुतॊष : कलयुग की रामायण,
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल': जो कहना था कह दिया अब ऊपर वाले के हाथ मे है.....

16 March 2008

होली तो ससुराल


होली तो ससुराल की बाक़ी सब बेनूर
सरहज मिश्री की डली,साला पिंड खजूर
साला पिंड-खजूर,ससुर जी ऐंचकताने
साली के अंदाज़ फोन पे लगे लुभाने
कहें मुकुल कवि होली पे जनकपुर जाओ
जीवन में इक बार,स्वर्ग का तुम सुख पाओ..!!
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होली तो ससुराल की बाक़ी सब बेनूर
न्योता पा हम पहुंच गए मन संग लंगूर,
मन में संग लंगूर,लख साली की उमरिया
मन में उठे विचार,संग लें नयी बंदरिया .
कहत मुकुल कविराय नए कानून हैं आए
दो होली में झौन्क, सोच जो ऐसी आए ...!!
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होली तो ससुराल की ,बाक़ी सब बेनूर
देवर रस के देवता, जेठ नशे में चूर ,
जेठ नशे में चूर जेठानी ठुमुक बंदरिया
ननदी उम्र छुपाए कहे मोरी बाली उमरिया .
कहें मुकुल कवि सास हमारी पहरेदारिन
ससुर देव के दूत जे उनकी हैं पनिहारिन..!!
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सुन प्रिय मन तो बावरा, कछु सोचे कछु गाए,
इक-दूजे के रंग में हम-तुम अब रंग जाएं .
हम-तुम अब रंग जाएं,फाग में साथ रहेंगे
प्रीत रंग में भीग अबीरी फाग कहेंगे ..!
कहें मुकुल कविराय होली घर में मनाओ
मंहगे हैं त्यौहार इधर-उधर न जाओ !!