26 October 2008

हिन्दु आतंकवादि गंदी राजनीति का गंदा खेल

मालेगांव में हुये विस्फोट के मामले में पुलिस के द्वारा हिन्दु संगठन पर लगाये गये आरोप में कितनी सच्चाई है यह तो समय आने पर मालूम होगा लेकिन कुछ प्रशन है जो दिमाग में चुभ रहा है - आतंकवादी घटना में हिन्दू की गिरफ्तारी उतनी चौंकाने वाले नहीं है जितनी उसकी टाइमिंग। आखिर अभी तक साध्वी और उनके साथ गिरफ्तार लोगों के ऊपर मकोका के तहत मामला क्यों दर्ज नहीं किया गया है और यह मामला भारतीय दण्ड संहिता के अंतर्गत ही क्यों बनाया गया है जबकि आतंकवादियों के विरुद्ध मकोका के अंतर्गत मामला बनता है। इससे स्पष्ट है कि संगठित अपराध की श्रेणी में यह मामला नहीं आता। आज एक और तथ्य सामने आया है जो प्रमाणित करता है कि मालेगाँव विस्फोट में आरडीएक्स के प्रयोग को लेकर महाराष्ट्र पुलिस और केन्द्रीय एजेंसियों के बयान विरोधाभासी हैं। महाराष्ट्र पुलिस का दावा है कि वह घटनास्थल पर पहले पहुँची इस कारण उसने जो नमूने एकत्र किये उसमें आरडीएक्स था तो वहीं महाराष्ट्र पुलिस यह भी कहती है कि विस्फोट के बाद नमूनों के साथ छेड्छाड हुई तो वहीं केन्द्रीय एजेंसियाँ यह मानने को कतई तैयार नहीं हैं कि इस विस्फोट में आरडीएक्स का प्रयोग हुआ उनके अनुसार इसमें उच्चस्तर का विस्फोटक प्रयोग हुआ था न कि आरडीएक्स। इसी के साथ केन्द्रीय एजेंसियों ने स्पष्ट कर दिया है कि मालेग़ाँव और नान्देड तथा कानपुर में हुए विस्फोटों में कोई समानता नहीं है। अर्थात केन्द्रीय एजेंसियाँ इस बात की जाँच करने के बाद कि देश में हिन्दू आतंकवाद का नेटवर्क है इस सम्बन्ध में कोई प्रमाण नहीं जुटा सकी हैं।
जामिया नगर इनकाउंटर में कथित सेक्युलर लोग पुलिस के सबूतों को मानने से इनकार कर रहे है जहाँ कई राउन्ड गोली चला खतरनाक हथियार मिला लेकिन मालेगांव में पुलिस के सूत्रों के हवाले से मिली खबर पर हो-हल्ला क्यों क्या हिन्दु संघटन के पकरे गये कार्यकर्ता के साथ किसी तरह का मुठभेड़ हुआ था क्या किसी तरह का खतरनाक हथियार मिला था नही सिर्फ पुलिस के द्वारा आरोप लगायें गयें है। यह अभी तक सिद्ध नही है कि बम धमाकों में इन्ही लोगों का हाथ है। अगर ये विस्फोट करते तो क्या इतने नासमझ हैं ये कि अपना मोटर बाइक का इस्तेमाल करते। 2000 का कही से साइकल भी तो खरीद सकते थे या फिर यैसा भी नही है कि मोटर पर विस्फोट करने से असर कुछ ज्यादा होता है। कुछ दिन पहले तक मालेगाव विस्फोट का सक सिमी पर था एकाएक चुनाव नजदिक आते ही हिन्दुओं के संस्था का नाम कैसे जुड गया यह बात कुछ हजम नही हो रहा है। पुलिस इस विस्फोट में R.D.X का प्रयोग का बात कह रही थी लेकिन अभी तक किसी पुलिस बाले ने बताया नही कि इनके पास R.D.X आया कहा से किसने बेचा कहा से लाया इन्होंने। मालेगांव के अगर छोड दे तो सैकडों आतंकी बम विस्फोट हुये जिसका स्पेशल पुलिस पता नही लगा पाया लेकिन चुनाव के ठिक पहले पुलिस के ये कैसे पता चल गया कि मालेगांव में विस्फोट एक महिला साध्वि का हाथ है। सरकार जिस तरह से कुछ दिन पहले से बजरंग दल, विश्व हिन्दु परिषद पर बैन लगाना चाहता था लेकिन किसी तरह के सबूत ना मिलने पर इन संस्थाओ को काग्रेस सरकार बैन नही लगा पाया कही ये निराशा में उठाया गया यह कदम तो नही है।
अगर देखा जाये तो चुनाव में उतरने के लिये सरकार में बैठे राजनितीक दल के पास जनता के सामने मुह दिखाने लायक कुछ भी नही है। महगाई आसमान कब का छु चुका है वित्त मंत्री के बार - बार आश्वासन के बावजुद महगाई उतरने का नाम नही ले रहा है। किसानों को उपजे फसल का दाम मिल नही रहा है किसान कर्ज में दबे जा रहे हैं जिसके फलस्वरुप किसान अत्महत्या कर रहें हैं। आतंकवाद के समर्थन में सत्ताधारी नेताओं के उतरने से इन दलों पर से आम जनता का भरोसा पहले डिग चुका है। एक अदना सा आतंकवादि को फांसी तक ये सरकार नही दे पाया। पोटा जैसा कानून जो आतंक का कमर लगभग हिन्दुस्तान में तोड दिया था उस पोटा को हटा कर सरकार ने इस देश में आतंकवाद को दुबारा से फलने फुलने का मैका दिया । इस देश में अवैध रुप से रहे 5 करोड से ज्यादा बाग्लादेश जो कि आतंकवाद, चोरी, अपहरण, पाकेटमारी, डकैती जैसी घटना में संलिप्तता पाया गया है वैसे अपराधी तत्व को सिर्फ वोट राजनीति के कारण इस देश में बिठा कर रखा गया है और इनका राशन कार्ड, वोटिग कार्ड बना कर सरकार अघोषित रुप से इन्हें नागरिकता प्रदान कर रही है।
आज हिन्दुस्तान का हर एक कोना जल रहा है काग्रेस प्रायोजित उत्तर भारतीयों का पिटाई जिसमें अभी तक कितनों का जान जा चुका है और सरकार ताली बजा कर मजा ले रहा है। नार्थ इस्ट में बिहार के मजदुरों का हत्या। अमरनाथ जमीन विबाद में सरकार का चेहरा बेनकाब हो गया। राम सेतु जिस से देश को एक पैसे भी फायदा नही होने बाला है उस राम सेतु को तोड़ने के लिये सरकार जिस तरह से ललायित दिख रही है उस से पता चलता है दाल में जरुर कुछ काला है। राम का अस्तित्व नही है राम मनगंठत है लेकिन मुस्लामानों को हज के लिये हजार तरह का सुविधा और सव्सिडी दे कर काग्रेस पहले से ही हिन्दु के वोट से हाथ धो चुका है।
अब क्या करें चुनाव में जाना है और जनता को मुह भी दिखाना है दोबारा सत्ता में आने का सपना भी देखना है। अब बस एक तरीका है हिन्दु आतंकवादि । हिन्दुओ को निचा दिखा कर जनता को भ्रम में डालकर हिन्दू विरोधी माहौल तैयार करके मुस्लमानों को भय दिखा कर मुस्लिम तुष्टिकरण के द्वारा समाज को अगरे और पिछडे़ में बाँट कर दोबारा सत्ता मिल सकता है।
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22 October 2008

देश तोड़ते दो नेता

आज देश किस मोड़ पर जा रहा है, आज के नेतागण देश और धर्म को चूस रहे है। महाराष्ट्र में राज ठाकरे देश को तो समाजवादी पार्टी के कुछ नेता देश और धर्म को बॉंट रहे है। आज इन नेताओं की मानसिकता बन गई है कि बन गई है कि इस देश में उसी का राज है। आज इन अर्धमियों के आगे अपना देश और सविंधान नतमस्तक  हो गया है। आखिर ये देश और देश की राजनीति को किस दिशा में ले जाना चाहते है ? 

आज जिस प्रकार महाराष्ट्र में राज ठाकरे द्वारा कुराज किया जा रहा है, वह देश बॉंटने वाला है। आज ये क्षेत्रवाद के नाम पर देश को बॉट रहे है। वह देश की संस्‍कृतिक विरासत के लिये खतरा है। अगर इसी प्रकार क्षेत्रवाद के नाम पर राष्‍ट्र को बॉंटा जायेगा तो देश का बंटाधार तो तय है। भारत को उसकी विविधा के कारण जाना जाता है। पर इस विवि‍धा वाले देश को मराठा और तमिल के नाम पर कुछ क्षेत्रिय नेता आपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे है। ये नेता क्यो भूल जाते है कि जो क्षेत्रवाद की राजनीति करते है। वे भूल जाते है कि वे जिस मराठा मनुष की बात करते है वही के मराठा मानुष भारत के अन्य राज्यों में भी रहते है। अगर उनके हितो को नुकसान पहुँचाया जायेगा तो कैसा लगेगा ? 

आज कल सपा नेताओं को भी चुनाव आते ही मुस्लित हितो का तेजी से ध्‍यान आने लगा है। जिनते आंतकवादी मिल रहे है सपा उन्हे अपना घरजमाई और दमाद बना ले रही है। अमर सिंह की तो हर आंतकवादी से रिस्‍ते दारी निकल रही है। तभी देश की रक्षा करते हुये शहीदो से ज्‍यादा सपा और उसके नेताओं को अपने घर जामईयों की ज्‍यादा याद आ रही है।

यह देश आज आत्‍मघातियों से जूझ रहा है, जो क्षण क्षण देश को तोड़ रहे है। भगवान राजठाकरे को, और अल्लाह मियॉं अमर सिंह को सद्बुद्धि दे की ये देश के बारे कुछ अच्छा सोचे और देश के विकास में सहयोग करें। इसी में सबका भला है। 

21 October 2008

जेब ढीली हो ग ई क्या ?

आने वाली है दिवाली

उसके पहले ही होगी जेबें खाली

धनतेरस पर धन जाये

एक खरीदे कंगन अगूठी

मुफ्त पायें।

बीबी की जिंद

बच्चों के कपड़े करते हैं कंगाल

हाय ये मौसम और ये त्योहार

खुश हूँ मैं भी ये दिखता है सब को

अन्दर ही अन्दर दुखता दिल है

और चुप मैं हूँ

करता हूँ मैं अब यही कामना

जाये ये त्यौहार

छूटे जेब का भार

राष्ट्रीय एकता परिषद का राजनीतिक दुरुपयोग

कांग्रेस सरकार राष्ट्रीय एकता परिषद के मंच का राजनीतिक दुरुपयोग कर रहा है। यह राष्ट्रीय एकता का ढकोसला है। विगत सप्ताह एकता परिषद की दिल्ली में हुई बैठक के एजेंडे से ही यह झलक मिल रही थी कि यह बैठक बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद को घरने के दुराग्रह के साथ आयोजित की जा रही थी क्योंकि आज देश के सामने जो सबसे गंभीर संकट है अर्थात आतंकवाद, वह इस बैठक के एजेंडे में ही नहीं था। बल्कि उड़ीसा और कर्नाटक की हिंसक घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में साम्प्रदायिकता को बैठक का केन्द्रीय विषय बनाया गया। यह स्पष्ट है कि परिषद की यह बैठक आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर साम्प्रदायिकता के नाम पर हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों और भाजपा को आरोपित कर छद्म सेकुलर जमात अल्पसंख्यक समुदायों को यह संदेश देना चाहती थी कि वही उनकी हिमायती है। बजरंग दल के खिलाफ स्वर को मुखर करने के लिए समाजवादी पार्टी के महासचिव अमर सिंह को परिषद का सदस्य मनोनीत किया गया जबकि अमर सिंह ने आतंकवादियों के खिलाफ पुलिस मुठभेड़ में शहीद हुए पुलिस अधिकारी शहादत पर ही प्रश्न चिन्ह लगा दिया था। अमर सिंह जैसे लोगों को परिषद में शामिल कर सरकार क्या संदेश देना चाहती है। इस बैठक की गंभीरता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि बैठक में विशष आमंत्रित के रूप में बुलाए गए कामरेड ज्योति बसु ने स्वयं उपस्थित न होकर अपना जो संदेश भेजा वह परिषद की कार्यशैली व भूमिका पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। भाजपा द्वारा आतंकवाद जैसे गंभीर विषय को बैठक के एजेंडे में शामिल करने के लिए जोर देने पर सरकार ने चरम पंथ को एजेंडे में शामिल किया क्यों कि संप्रग सरकार व उसके छद्म धर्मनिरपेक्ष घटक दल जानते हैं कि आतंकवाद पर व्यापक बहस हुई तो उन सबकी पोल खुलेगी और फिर देश की जनता जानेगी कि सोनिया पार्टी की सरकार और लालू,पासवान व मुलायम सिंह जैसे उसके सहयोगी किस तरह मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए न केवल आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाने से कतरा रहे हैं बल्कि आतंकवादी समूहों के पैरोकारी कर रहे हैं।
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कितना कठिन है सबको साथ लेकर चलना


"अनूप जी"की एक लाइना देख कर लगता है की एक दूसरे से जुड़ने में कितना आनंद है । 'अनपेक्षित विवाद
को लेकर जो बबाल मचा "उस पर अनूप जी ने बस इतना कहा लिखते रहिए !" वास्तव में लिखने की धारा में कमी न हो उनका उद्द्येश्य है इसके पीछे । इसमें बुराई क्या है अगर बुराई है तो "इनके"कार्यो में रचनात्मकता की चेतना के अभाव को देखा जा सकता है । राज ठाकरे जैसे व्यक्तियों को कितना भी राज़ ठाकरे जी "सादर-अभिवादन"">समझाया जाए हजूर के कानों में जूँ भी न रेंगेगी तो ये भी जान लीजिए हजूर "जिंदगी "से हिसाब मांगती रहेगी कल की घड़ी तब आप भौंचक रह जाएंगे और तब आपके आंसू निकल आएँगे ये तय है। ये हम नहीं लोगों का कहना है जिन को आप क्षेत्र,भाषा,धर्म,प्रांत,के नाम पर तकसीम कर रहें हैं । "वशीकरण, सम्मोहन व आकर्षण हेतु “' किसी का या "मन्त्र"-का उपयोग करिए । "ताना-बाना"बिनतीं, विघुलता का स्वागत
विघुलता जी एक अच्छी साहित्य कार होने के साथ साथ पत्रकारिता से भी सम्बद्ध हैं तथा सभी ब्लॉगर जो आज की चर्चा में शामिल हैं उनका हार्दिक सम्मान जिनके चिट्ठे छूट गए उनसे क्षमा याचना के साथ
आपका स्नेह एवं कभी कभार कोप भाजन
गिरीश बिल्लोरे मुकुल

18 October 2008

आतंकवादियों को मारो मत भारतरत्न का अर्वाड दो

आज हिन्दुस्तान में सत्ताधारी नेता बाटला हाउस में मारे गये आतंकवादियों के पझ में खडे़ हैं और जिस तरह से ब्यानबाजी कर रहें है लगता है पुलिस ने आतंकवादियों को मार कर कोई गुनाह किया हो। आमिताभ बच्चन के पिछलग्गु नेता अमर सिंह इस मामले में पुलिस बालों पर पहले अगुली उठा चुके हैं और उनका केस भी लड़ने को तौयार हैं आज सत्ता पक्ष के नेता इस होड़ में उलझें हैं कि कौन कितना ज्यादा आतंकवादियों का हिमायती है। काग्रेंस कुछ के नेता प्रधानमंत्री से मिल कर बाटला हाउस में मारे गये आतंकवादियों के मारे जाने पर पुलिस के कार्यवाही पर प्रश्नचिन्ह लगाने गये थे। वैसे पुलिस को क्लिनचीट सुरक्षा सलाहकार नारायणन दे चुके हैं। वैसे आजकल आतंकवादियों के सर्मथक नेताओ का लिस्ट कुछ ज्यादा बडा़ होता जा रहा है सबसे पहले बाटला हाउस मामलें मे अर्जुन सिंह ने आतंकियों के केस लड़ने का मनसा जाहिर किया था। तो रामविलास पासवान जो हमेशा से ओसामा बिन लादेन के हमसक्ल को साथ में लेकर चलते हैं क्यों पीछे रहते लगे हाथ उसने भी ब्यान जारी करके आतंकियों के साथ गलवहिया डालना सुरु किया फिर क्या था लालु प्रसाद कहा पीछे रहने बाले थे लगे हाथ उन्होंने भी अपनी देशभक्ति का पिटारा खोल कर रख दिया।
आखीर कब तक मुस्लिम तुस्टीकरण का खेल इस देश में चलता रहेंगा। आखिर कब तक इस देश में अल्पसंख्यक असुरक्षा के नाम पर दबाब डाल कर अपना उल्लु साधते रहेगा। हिन्दुस्तान ऎसा देश है जहा के अल्पसंख्यक सबसे ज्यादा सुरक्षीत है। पुरे विश्व में 57 मुस्लिम देश है जो किसी तरह का हज में सब्सिडी नही देता है लेकिन हिन्दुस्तान में मुस्लमानों को सब्सिडी दिया जाता है मुस्लमानों सभी हवाई अड्डा पर सिर्फ साल में कुछ दिन खुलने बाला पाँच सितारा हज हाउस बनाकर दिया गया। आतंकवाद का नर्सरी को सरकार के द्वारा पैसा मुहया किया जाता है मस्जिदों के मरम्मत के नाम पर करोडों खर्च करती है सरकार क्या ये सब सुविधा हिन्दुओ को मिलता है आज हिन्दुस्तान में हिन्दुओ के मुकाबले ज्यादा सुविधा दी जा रही है मुस्लिमानों को। हिन्दुस्तान के मुस्लिम बहुल राज्य में हिन्दु मुख्यमंत्री नही बन सकता है मुस्लिम उत्पात मचा कर रख देंगे। जैसा कि अफजल को फांसी के मामले में उन्होंने पहले सभी को चेता दिया है अगर अफजल को फांसी दिया गया तो देश में दंगा भरक जायेगा। लेकिन हिन्दु बहुल राज्य में मुस्लिम मुख्यमंत्री बने है और आगे भी बनते रहेंगे। हिन्दुस्तान के कुछ नेता के नासमझी के कारण हिन्दुस्तान अपना 30% जमीन का टुकरा अल्पसंख्यक को अलग देश के लिये दे दिया लेकिन हिन्दु अयोध्या में एक मन्दिर बनाने के लिया अल्पसंख्यक के आगे निहोरा कर कर रहा है। गोधरा में मारे गये हिन्दु के बाद भडके दंगा का नासुर आज भी सभी को जला रहा है सेकुलर इसे हिन्दु के लिये सबसे बडा़ कलंक बना दिया हो लेकिन मोपला, कलकत्ता, भागलपुर जैसे हजारों दंगा हुआ जिसमें मारे गये हिन्दुओं पर आज कोई आँसु बहाने बाला नही है। जम्मु काश्मिर से 4 लाख से ज्यादा हिन्दुओं को लात मार कर निकाल बाहर कर दिया गया किसी के आँख में आसु नही आया कोई नेता, सेकुलर एक शब्द इस मामले में नही बोला। आज पाकिस्तान और बाग्लादेश में हिन्दुओ की हालत जानवरों से भी बत्तर है उन्के 12 साल की लडकियों को घर से उठा कर बालात्कार किया जा रहा है जबरदस्ती शादी किया जा रहा है किसी ने नही बोला लेकिन दो आतंकवादियों के मरने पर इतना हायतैबा मचा रखे है जैसे इनका अपना सगा बाला मारा गया हो। मुलायम सिंह यादव और आमिताभ बच्चन के पिछल्लगु अमर सिंह अगर चिल्लम पो मचाते हैं तो समझ में आता है क्यों कि एक आतंकवादि तो उन्ही के पार्टी के जिला अध्यक्ष का बेटा था।
अब समय आ गया है यैसे नेताओ से पुछने का कब तक ये अल्पसंख्यक असुरक्षा के नाम पर ब्लैकमेलिग का खेल खेला जायेगा और देश को गर्त में ढकेलने का काम ये नेता करते रहेंगे। हिन्दुस्तान के अल्पसंख्यक से ज्यादा किसी और देश का अल्पसंख्यक सुरक्षीत नही है उन्हें जितना सहुलियत हिन्दुस्तान में मिलता है उतना और किसी देश में नही मिलता है लेकिन फिर ये क्यों दिखाने का कोशीश किया जाता है कि हिन्दुस्तान में अल्पसंख्यक असुरक्षा है। उन्हें किसी भी तरहा का सुविधा यहा नही मिल रहा है। अल्पसंख्यक को अगर ऎसा लगता है तो उन्हें किसी ने रोका नही है अपना रास्ता नापे और कही जाकर सुरक्षीत ठीकाना का खोज लें और हमें शान्ती से रहने दें।

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15 October 2008

गंदे हाथ धोया क्या ?

आज हैप्पी वास डे है । आपको जैसे मालूम नहीं था वैसे मुझे भी नहीं पता था अगर मेरा दोस्त ना फंछता कि " आज तुमने हाथ धोया तो मैंने सोचा क्या फालतू सवाल है ? तब बताया उसने ये बात । पता नहीं भैया कौन - २ से दिवस मनाने होगें । देखिये कहीं ऐसा न हो कि जीते जी खुद के लिए मरण दिवस का भी प्रचलन हो सकता है । आज हाथ तो धो ही लेना । बाकी का काम कीटाणु करेंगे ।

14 October 2008

I’m Tarun Joshi basically from a small town of Pali district in Rajasthan state called as Rani.
I’m a 20year old boy who wants to do something new & passionate about doing some extraordinary works. In connection of same I just want to perform an all Rajasthan bicycle tour with the aim of mobilizing & motivate the public for water & soil conservation & Child rights with the title of stop child labor & move them into the schools. I’ll visit every district includes it’s headquarter.

My route chart is as followed.
Proposed Bicycle tour
(Bus)
Rani → PALI → Sirohi → Jalore → Badmer → Jaisalmer → Jodhpur
(START) ↓
Nagaur
↓
Sikar → JAIPUR Ajmer
↑ (FINISH) start from 14th Nov. 2008 ↓
Churu Tonk
↑ ↓
Bikaner Bhilwara
↑ ↓
Shri Ganga Nagar RajSammand
↑ ↓
Hanuman Garh Uaipur
↑ ↓
Jhunjhanu Dungar Pur
↑ ↓
Alwar Banswara
↑ ↓
Bharat Pur Chittorgarh
↑ ↓
Dhol Pur Jhalawar
↑ ↓
Karauli ← Dausa ← Sawai Madhopur ← Bundi ← Baran ← Kota


My requirements are following
1. Laptop
2. Projector
3. Digital Photo Camera
4. Digital Movie Camera (optional)
5. Transparencies/CD’s/ DVD’s (regarding the issue)

BUDGET
CEREMONEY స్టార్ట్ 10000
LAPTOP 38000
PROJECTOR 20000
DIGITAL PHOTO CAMERA 10000 Important
DIGITAL MOVIE CAMERA 25000
TRANSPERENCIES 5000
TRANSPORTATION (CYCLE WITH GEAR) 15000 Important
FILMS RELATED TO TOPICS 5000
DAILY ALLOWNCE (3 MONTHS*500 DAILY) 45000 Important
CEREMONEY FINISH 20000

TOTAL 193000
TENTATIVE AMOUNT (MINIMUM) 170000
TENTATIVE AMOUNT (MAXIMUM) 200000
IMPORTANT ITEMS + HAND MIC WITH BATTERIES+ Misc. (70000+10000+15000) 100000 With a low budget

You can donate me some amount as per your will to my following accounts..
S.B.B.J : 61024544064] The Bank of Rajasthan Ltd. 0270101418195] IDBI 273104000029500
Suggestions are required about the program.
With best regards,

Tarun Joshi “NARAD” (Writer & Poet)
Behind Panchayat Samiti,
Kenpura Road,
RANI (PALI) 306115
Phone 02934-222665(R)
9251610562 (M)
Email me on tdjoshi_narad@yahoo.co.in

13 October 2008

स्वामी विवेकानंद जी कहते है -

"तुम्‍हारे भविष्‍य को निश्चित करने का यही समय है। इस लिये मै कहता हूँ, कि तभी इस भरी जवानी मे, नये जोश के जमाने मे ही काम करों। काम करने का यही समय है इसलिये अभी अपने भाग्‍य का निर्णय कर लो और काम में जुट जाओं क्‍योकिं जो फूल बिल्‍कुल ताजा है, जो हाथों से मसला भी नही गया और जिसे सूँघा ही नहीं गया, वही भगवान के चरणों मे चढ़ाया जाता है, उसे ही भगवान ग्रहण करते हैं। इसलिये आओं ! एक महान ध्‍येय कों अपनाएँ और उसके लिये अपना जीवन समर्पित कर दें "

11 October 2008

मुश्किल है तो बस शरूआत करना

किसी कार्य की शुरूआत करना बहुत ही कठिन होता है । मन में तरह के सवाल उठते हैं , नयापन से कुछ घबराहट भी होती है । हम अपने नये कार्य को लेकर चिंतित भी रहते है । जहन में ये भी बात रहती है कि जो मैं कर रहा हूँ वह कैसा ? सफलता मिलेगी या नहीं याफिर मैं इसे पूरा भी कर पाऊंगा कि नहीं। इसी जद्दोजहद के बीच इंसान का आत्मविश्वास और कार्य के प्रति लगन की भावना उसे नये कार्य को करने के लिए प्रेरित करती है । बदलाव इंसान की जरूरत है पर बदलाव का क्रमिक रूप से होना बहुत ही जरूरी है एकाएक परिवर्तन को हम सही से अपना नहीं पाते है याफिर मुश्किल से सहेज पाते है ।

इस लिये जरूरत है तो बस एक कदम आगे बढ़ाने की । रास्ते खुद ब खुद बनते जायेगें ।