28 April 2008
एक साथी एक सपना ...!!
हौसले संग भीड़ से संवाद के ।
०००००
हम चलें हैं हम चलेगे रोक सकते हों तो रोको
हथेली से तीर थामा क्या मिलेगा मीत सोचो ।
शब्द के ये सहज अनुनाद .. से .....!!
००००००
मन को तापस बना देने, लेके इक तारा चलूँ ।
फर्क क्या होगा जो मैं जीता या हारा चलूँ ......?
चकित हों शायद मेरे संवाद ... से ......!!
००००००
चलो अपनी एक अंगुल वेदना हम भूल जाएं.
वो दु:खी है,संवेदना का, गीत उसको सुना आएं
कोई टूटे न कभी संताप से ......!!
००००००
v गिरीश बिल्लोरे मुकुल ९६९/ए,गेट न०. ०४ जबलपुर,म०प्र०
27 April 2008
बावरे फकीरा यूँ बना
मुझसे क्या मिलेगा ....?शायद यही सोचा होगा बेचारों ने
सच मिलता भी क्या हम ठहरे फोकटिए गीतकार शब्दों का धंधा वो भी पोलियो ग्रस्त बच्चों की मदद के लिए ...!
संकल्प "मिसफिट" हूँ न दुनियाँ के लिए ।
मेरे भाई सह मित्र जितेन्द्र जोशी ने कहांश्रेयस कर लेगा कंपोजिंग । गीत देदो उसे । मामला तय हो गया श्रेयस की कम्पोजीशन पर आभास को गाना था , फीमेल वोईस के लिए संदीपा,कोरस के लिए दीवान साहब,योगेश,श्रद्धा,मेरी सहचर सुलभा सहित इक लम्बी कतार में लोग आगे आए । वी ओ आई में जाने की कोई सूचना न थी ।
इंदौर आडिशन में जाने के पहले आभास का प्रोजक्ट पूरा हुआ....... मेरा सपना भी आकार लेने लगा.... !
पूरी मस्ती और उछाह के साथ पूरी हुई रिकार्डिंग , यू ट्यूब पर यही मस्ती है पोस्ट कर रहा हूँ।
UP के स्नातक शिक्षा उपधिधारियो से निवेदन
26 April 2008
इक भद्दी सी टिपण्णी

vijayshankar said...
मतलब ये कि अब गैर उत्पादक चीजों से संस्कारधानी की शान बढ़ा करेगी। जबलपुर की शिनाख्त और लाज बचाने के लिए अब आभाष जोशी बचा है. आपने अपने तईं उन लोगों का ज़िक्र किया है जो जबलपुर की शान और प्रतिष्ठा थे. लेकिन कुछ दिनों से देख रहा हूँ कि आप भी समय के दबाव में बहे चले जा रहे हैं. नर्मदा की लहर की आपको चिंता ही नहीं. कम से कम चौंसठ जोगिनी मन्दिर का जिक्र ही कर देते कभी. स्त्रियों के जितने विविध रूप आज वहाँ जिंदा हैं उतने तो खजुराहो में भी नहीं हैं दोस्त. वह पूरे विश्व के लिए भारतीय नारी के अध्ययन का केन्द्र बन सकता है. न्रितत्वशास्त्रियों के लिए भी. मगर अफ़सोस. मुझे शर्म आने लगी है कि जबलपुर में मेरी ससुराल है.सुभद्रा कुमारी चौहान का नगर आज किस तरह दहशतगर्दी और कुसंस्कारधानी में तब्दील हो गया है, इसकी आप चर्चा तक नहीं करते. इसीको कहते हैं- आँख के अंधे नाम नयनसुख! आभाष जोशी आपको मुबारक हो
24 April 2008
हनुमान जयंती के दिन भाई समीर " उड़नतश्तरी "से साक्षात् मुलाकात
जब एक साल पहले मैंने ब्लॉग लिखना प्रारम्भ किया सोचा करता था यह सब बकबास है और अपना समय ख़राब करना है . एक दिन मेरे ब्लॉग मे पहली टिप्पणी आई कि भाई मै जबलपुर का हूँ आप भी जबलपुर के है अपने अच्छा लिखा है और आप जबलपुर के बारे मे अधिकाधिक ब्लॉग मे लिखे . यह टीप " उड़नतश्तरी " जी ने दी थी फ़िर सोचने लगा कि " उड़नतश्तरी " महाराज है कौन ? खोज बीन मे पता चला कि आप जबलपुर संस्कारधानी के निवासी है और कनाडा मे विगत दस सालो से निवासरत है और दुनिया मे हिन्दी ब्लागिंग जगत के जाने-माने प्रमुख स्तम्भ है जिनकी पोस्ट और टिप्पणियां ब्लागिंग जगत मे धूम मचा देती है .
समीर जी मेरे ओरकुट मे भी मित्र है . दीवाली के बाद संदेश मिला कि मैं जबलपुर आ रहा हूँ आपसे मुलाकात होगी . फोन मोबाइल नम्बरों का आदान प्रदान हुआ . जब समीर जी कनाडा से मुबई आये तो एक दिन मुझे उनका फोन मिला महेन्द्र भाई मैं जबलपुर आ रहा हूँ जबलपुर आने पर उन्होंने फोन किया मैं जबलपुर आ गया हूँ . मैंने तत्काल ब्लॉगर भाई गिरीश बिल्लौरे जी को भाई समीर के आगमन कि सूचना दी . ब्लॉगर भाई विजय तिवारी जी के जन्म दिन के अवसर पर मिलना निश्चित किया गया . करीब ६ बजे शाम को समीर जी का फोन मिला कि मैं इस समय जबलपुर मे बल्देवबाग मे हूँ आप आ जाए मैं दस मिनिट के पश्चात बल्देवबाग क्रासिंग पहुँच गया . भाई समीर जी से मुलाकात हुई . समीर जी से मेरी पहली उनसे यादगार मुलाकात थी जिसका जिक्र मैं अपनी पहली कि पोस्ट मे कर चुका हूँ .
जबलपुर शहर के हिन्दी ब्लॉगर भाई पंकज स्वामी "गुलुश" के प्रयासों से विश्व रंगमच दिवस के अवसर पर हिन्दी साहित्य और हिन्दी ब्लॉग विषय पर भाई समीर लाल जी ने उदगार व्यक्त किए और हिन्दी ब्लॉग जगत से अधिकाधिक जुड़ने की अपील की . यहाँ उनसे मेरी मुलाकात हुई .
रविवार को हनुमान के दिन दर्शन करने मे मैं बाइक पर नगर भ्रमण कर रहा था . घूमते घूमते ठीक दस बजे सुबह मैं भाई समीर के घर उनके साक्षात् दर्शन करने पहुंच गया . भाई समीर जी से मुलाकात हुई करीब उनसे आधा घंटे तक हिन्दी ब्लागिंग के बारे मे बातचीत की और मैंने अपने ब्लॉग " सफल प्रहरी " मे यह जानकारी दी कि और बताया अपने पिता द्वारा ३९ वर्षो वर्षो पूर्व लिखित पुस्तक " भारत के वीर जवान " को देने का प्रयास कर रहा हूँ . काफी उन्होंने सराहना की . मुझे सुझाव भी दिए और कहा कि नेट पर प्रेमचंद जैसे किसी भारतीय उपन्यासकार के उपन्यास को प्रकाशित करने की कोशिश करना चाहिए . फोन पर तो बात कई उनसे हुई है .
कल रात्रि के समय और आज दिन पर टेलीफोनिक जानकारी मे आज बताया कि भाई महेन्द्र आज मैं मुम्बई निकल रहा हूँ आपसे फ़िर नवम्बर माह मे मुलाकात होगी . भाई समीर जी का स्वभाव सरल मधुर है मिलनसार है . हमेशा नव ब्लागरो को प्रोत्साहित करते है और उनका उत्साहवर्धन करते है . मैंने अनुभव किया है कि अति व्यस्तता के चलते और अपने परिवार को अपने साथ लिए समीर जी का व्यक्तित्व और कृतित्व हिन्दी ब्लॉग जगत के लिए पूर्ण रूप से समर्पित है और हिन्दी ब्लॉग जगत के विकास के लिए वे हमेशा चिंतन करते रहते है .
समीर जी जिन्होंने हिन्दी ब्लागिंग जगत को एक दूसरे से जोडा है और आपस मे भाई चारा भी स्थापित करने मे महत्वपूर्ण योगदान दिया है . ब्लागिंग जगत के हस्ताक्षर जबलपुर संस्कार धानी के लाल भाई समीर लाल जी " उड़नतश्तरी " ने अपने ब्लॉग लेखन से इस शहर को गौरंवान्वित किया है मुझे और जबलपुर शहर के सारे ब्लागरो को उन पर नाज है . समीर भाई आपसे फ़िर मुलाकात होगी आपकी यात्रा मंगलमय हो ...........
शिक्षा या व्यापार?
आजकल शिक्षा के बारे में अगर सोचें तो याद आता है एक व्यवसाय जो सबसे ज्यादा धन देता है और वो भी सबसे कम निवेश पर । शायद इसीलिए हर गली, हर मोड़ पर शिक्षा का दर्पण कहे जाने वाले शिक्षण संस्थान खुलते जा रहे हैं। प्राथमिक शिक्षा तो एक ऐसा व्यवसाय बन गया है , जो हर वो व्यक्ति करना शुरू कर देता है , जिसने किसी कारण से प्रभावित होकर कोई अन्य व्यवसाय न कर पाया, ये उसकी शिक्षा के व्यवसाय के अनुरूप न होने के कारण हुआ हो या, किसी अन्य कारण से।
उच्च शिक्षा एक और उदाहरण है इस बात का, विशेषकर व्यापार प्रबंधन संस्थान, ये तो लगता है लोगों का अधिकार बन गया है, जो बिना किसी सही प्रारूप के शुरू कर दिया जाता है। नतीजा भुगतते हैं वो विद्यार्थी जो इन संस्थानों के चक्कर में पड़कर अपना समय और पैसा बर्बाद कर देते हैं.
ऐसे संस्थानों की एक खासियत है, इनमे से बहुत से संस्थानों के पाठ्यक्रम को सरकार के किसी संस्था द्वारा मान्यता नहीं प्राप्त होता, जैसे कि AICTE, या UGC के द्वारा मान्यता नहीं प्राप्त होता, जिसके चलते शिक्षार्थियों को बहुत ही तकलीफों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि उनकी पहली जॉब में बहुत सी मुश्किलें आती हैं और उनका जॉब प्रोफाइल भी अन्य व्यापार प्रबंधन की परा स्नातक की उपाधि प्राप्त लोगों के नीचे की होती है.
आम तौर पर ये शिक्षण संस्थान उसके लिए द्वि उपाधि का लालच देते हैं, एक जिसको किसी संस्था की मान्यता प्राप्त नहीं होती, और दूसरी वो जो दूर शिक्षा प्राधिकरण के अंदर आती है।
आप सबों से यही उम्मीद है की अपने परिचितों को ऐसे संस्थानों के चक्कर में पड़ने से बचायेंगे, अन्यथा ऐसे ही देश का एक बहुत बड़ा शिक्षार्थी वर्ग अपना मार्ग नहीं पा सकेगा.
प्रतिभा और बाज़ार
20 April 2008
प्रतिउत्तर एवं आभार अभिव्यक्ति,
आशिक़ की बद्दुआ वाले भाई साहब
सादर अभिवादन
विजयशंकर जीसादर प्रणाम मेरे अग्रज शरद बिल्लोरे की यादें ताज़ा कराने आपका आभार आप को मेरे ब्लॉग'स के बारे में जानकारी कम ही हैसिर्फ़ और सिर्फ़ आभास के कारण मैंने अन्तरज़ाल का प्रयोग आरंभ किया । आभास ने वो कर दिया जो मैं क्या कोई भी सहजता से नहीं करता. जब वो १६ वर्ष का था तब उसने मेरा एलबम 'बावरे-फकीरा'गाया ये वही एलबम है जो पोलियो ग्रस्त बच्चों के लिए मदद जुटाएगा.अर्ध-सत्य ही उत्तेजना की वज़ह होते हैं....आप को विनम्र सलाह है की हाथी को पूरा देखने की आदत डालिए. आपको मालूम नहीं इस एलबम के सभी कलाकारों ने संस्कार वश नि:शुल्क सेवाएं दीं .
आप के उत्तेज़क विचारों ने मुझे झाखझोर दिया कविता के सृजक इतने तल्ख़ होतें हैं मुझे मालूम है किंतु वे हाथी को आंखों पे पट्टी बाँध के नहीं देखते गोया १८ बरस के बच्चे का कमाल,और उसकी तारीफ गले न उतरे मुझे नहीं लगता कविता ये सब सिखाती है। mahashakti जी का विचार मै आपकी भावनाओं की कर्द्र करता हूँ। हर व्यक्ति के नाम के साथ उस जगह का नाम जुड़ा होता है। आपकी बात पूरी तरह जायज है किन्तु मै इतना ही कहना चाहूँगा कि आज इलाहाबाद का नाम काफी हद तक लोग हरिवंश राय बच्चन और अमिताभ के कारण जानते है। और भी बहुत सी महानतम हस्ती हुई है उनके योगदान को नही नकारा जा सकता है। आज अभास उग रहा है तो कल और भी सूरज उगेगें। समझाने लायक है
जबलपुर का आभास पाकिस्तान में छा गया
संतुलित शिला

आभास तुम् धुआं धार की तरह गाओ........किंतु संतुलन मत खोना ........जबलपुर से रिश्ते का संतुलन जबलपुरिया होने का एहसास है इसे मत भूलना ।
18 April 2008
अब तो पानी का मोल समझो
ग्रीष्म का आगमन हो चुका है . सूरज दिनोदिन अपने तीखे तेवर दिखा रहा है और चारो और पानी के लिए त्राहि त्राहि मचना शरू हो गया है . मध्यप्रदेश का महाकोशल का क्षेत्र कभी वन,जल,खनिज सम्पदा से भरपूर था पर्यावरण से अत्यधिक छेड छाड़ और इन सम्पदाओ का अत्यधिक दोहन किए जाने के कारण समय के साथ साथ परिस्थितियां बदल चुकी है और इसका खामियाजा सभी को भुगतने पड़ रहे है . इन दिनों मध्यप्रदेश के कई जिलो मे पानी के त्राहि त्राहि मची हुई है .
दमोह,सिहोर जैसे जिले मे पुलिस वालो की उपस्थिति मे पानी का वितरण कराया जा रहा है नरसिहपुर के कई गाँवो के लोग पानी खरीदकर पी रहे है . तेंदुखेडा के दरजनो गाँवो के जलश्रोत सूख गए है और गाँवो मे पानी की कमी के चलते अभी से ग्रामीण क्षेत्रो के लोगो को समझ मे आने लगा है और इसकी स्पष्ट झलक उनके चेहरों पर नजर आने लगी है . तीन से पांच रुपये मे एक बाल्टी पानी भेजा जा रहा है . वही ठीक दमोह रोड पर स्थित तेंदुखेडा मे एक बाल्टी पानी दस से पन्द्रह रुपये मे और एक कनस्तर पानी पन्द्रह रुपये से बीस रुपये मे बेचा जा रहा है लोग मजबूर है कि उन्हें पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है .
भूजल का स्तर लगातार गिरकर १५० से २०० फीट तक पहुँच गया है और दिनोदिन गिरता जा रहा है वोरवेलो के माध्यम से भूजल का अत्यधिक शोषण किया गया है और किया जा रहा है . जल एक मूलभूत आवश्यकता है जिसके बिना जीवन सम्भव नही है . अब वह समय आ गया है कि सभी को मिलजुलकर जल संरक्षित करने की दिशा मे सामूहिक प्रयास करने होंगे अन्यथा भावी पीढी हमारी पीढ़ी को क्षमा नही करेगी और भविष्य मे पानी के लिए संघर्ष की स्थितियां निर्मित हो सकती है




