04 December 2009

यह देश है तुम्हारा खा जाओ इसको तल के

कांग्रेस की डगर पे चमचों दिखाओ चल के
यह देश है तुम्हारा खा जाओ इसको तल के

दुनिया की बात सहना और कुछ न मुंह से कहना
रूई कान में तुम देके आगे को बढ़ते रहना
रख दोगे एक दिन तुम मुंह सब के बंद कर के

कांग्रेस की डगर पे चमचों दिखाओ चल के
यह देश है तुम्हारा खा जाओ इसको तल के

अपने हो या पराये कोई न बचने पाये
डाइजेशन देखो तुम्हारा हर्गिज न गड़बड़ाये
मौका बड़ा कठिन है, खाना संभल संभल के

कांग्रेस की डगर पे चमचों दिखाओ चल के
यह देश है तुम्हारा खा जाओ इसको तल के

भाई हो या भतीजा तुम सबका ध्यान रखना
फुल सात पीढियों का तुम इन्तजाम रखना
स्विस बैंक की तिजोरी तुम खूब रखना भर के

कांग्रेस की डगर पे चमचों दिखाओ चल के
यह देश है तुम्हारा खा जाओ इसको तल के

8 comments:

Anonymous said...

bahu achche

prashant said...

क्या खूब लिखा है, इसी तरह लिखते रहें

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर गीत ओर बिलकुल सच

संगीता पुरी said...

हंसने का मन भी होता है .. और रोने का भी .. बहुत सुंदर रचना है !!

महाशक्ति said...

भाई हमसफर, आपने तो हँसने को मजबूर कर दिया।

Tara Chandra Gupta "MEDIA GURU" said...

kya dhansu likh mara hai hamsafar ji. aazadi ke bad bhi aise halat hai. kangresh ne to vakai ................
lekhte rahiye........

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

सत्य को लाजवाब ढंग से लिखा है ... |

सुन्दर !

Udan Tashtari said...

बेहतरीन..अभी नजर पड़ी. :)