23 January 2010

मै और तस्‍वीर

dard ko
मै रोज उसकी तस्वीर को लेकर,
देर तक निहारता हूँ।
शायद अब मेरे दर्द को समझेगी,
और मेरा हाल पूछेगी।।

अखिर तस्वीर तो भी निष्‍ठुर थी,
अखिर तस्‍वीर भी तो उसकी थी।
मूक तस्‍वीर के आगे मेरी आस टूट गई,
याद मे जी रहा हूँ बस सांस तो टूट गई।।

mai aur tasvir

5 comments:

श्रद्धा जैन said...

अखिर तस्वीर तो भी निष्‍ठुर थी,
अखिर तस्‍वीर भी तो उसकी थी।
मूक तस्‍वीर के आगे मेरी आस टूट गई,
याद मे जी रहा हूँ बस सांस तो टूट गई।।

bahut sunder panktiyan
tasveer kaise dil bahlaaye

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर रचना, ओर चित्र भी सुंदर लगा

Mithilesh dubey said...

बहुत ही सुन्दर रचना लगी, भाव भी लाजवाब लगे ।

निर्मला कपिला said...

behatareen rachnaa shubhkamanayen

DEEPAK SHARMA said...

तस्वीर का नजराना, और फिर उसमे डूब जाना...............
कौन कहे उस खुदा से ये सब ..................
की किसको मैंने पाया , और किसको है खोना ...........
तुम नहीं तो क्या हुआ ये तस्वीर ही सही.............
प्यार का एहसास और फिर वही कहानी..............
सुनाती है तेरी मेरी कहानी.................
तस्वीर ही सही मेरी जिंदगी की जुबानी...................
सुन लो सब ये बयाँ अब कैसे रही ये मोहब्बत के दास्तानी ...................