22 May 2015

सप्तदचिरजीवि स्तुति:

अश्वत्थारमा बलिर्व्या सो हनुमांश्च विभीषण:।
कृप: परशुरामश्च सप्तैते विरजीजीविन:।।
सत्ते्तान् संस्मररेन्नित्यं मार्कण्डेवयमथाष्टमम्।
जीवेद् वर्षशतं सो‍Sपि सर्वव्यातधिविवर्जित:।।

स्‍तुति पाठ से लाभ- उक्‍त स्‍तुति के पाठ करने से यात्रा सुखद होती है, रोग-व्‍याधि का निवारण हो आयु में वृद्धि होती है। इस मंत्र के उत्‍तम परिणाम के लिये नित्‍य प्रात: व रात्रि में आठ-आठ बार वाचन करना चाहिए।

1 comment:

राजेश कुमार मिश्र said...

आपके द्वारा किया जा रहा अच्‍छा प्रयास, और मंत्रों की अपेक्षा है।