14 August 2008

दोस्‍ती

दिल के रिश्तों को करीब से देखो,
तो दोस्ती नज़र आती है।
दोस्तों की नज़र में दोस्ती,
मात्र कोई शब्द नही है।
जिधर चल दिये दो पग,
उधर चल दिया दोस्ती का कारवां।
बढ़ती जायेगी उम्र,
लेकिन ये कारवाँ न रूकेगा।

4 comments:

nukhtachini said...

bahot achchi kavita hai.

राज भाटिय़ा said...

धन्यवाद सुन्दर कविता के लिये

Udan Tashtari said...

सुन्दर कविता !!

पंगेबाज said...

कविता तो खुबसूरत है ही . लेकिन इत्ता खूबसूरत ब्लोग , टिपियाने को भी मन नही करता , काहे ?कही गंदा ना हो जाये जी :)