11 February 2010

वर्ड वैरिफिकेशन याने पानी पीकर जात पूछना…….

p4752010_lये चीज बङी ही ………क्या कहूं घटिया या बढिया या गंदी या खतरनाक या बेकार नहीं कह सकता ….क्यों कि मुझे कोई अधिकार नहीं ये सब कहने का ….पर क्या करूं मै तो बङा परेशान हो जाता हूं इससे….आप ने कोई ब्लोग पोस्ट पढी बङे मन  से….. आपके मन मैं कोई विचार समर्थन मैं या विरोध मैं उमङ घुमङ कर आता है ….अब आपके मन के जवाब को देने के लिए आप अपना अमूल्य समय खर्च कर आप एक टिप्पणी टंकित करते हैं…और जैसे ही आप उसे प्रकाशित करने की चेष्टा करते हैं तो एक दुःस्वप्न की तरह एक डिब्बा सा खुल जाता हैजिसमें आढे तिरछे अक्षर से खुल जाते हैं जिनको देखते ही आप भयभीत हो जाते हैं…पर अब आपके पास लौटने का कोई रास्ता आपको टुप्पणी पूरी करनी ही है तो आप को इनके भी पार जाना होगा  और बमुश्किल आप उन अक्षरों को जो शायद मंगल ग्रह के प्राणियों द्वारा काम लीजाती होगी ..उनको आंखे फाङ फाङ कर कर देखते हैं और उनको अपने    संपूर्ण अर्जित ज्ञान के आधार पर इस पहेली को सुलझाने का प्रयास करते हैं…..कई बार आप इसमें सफल हो जाते हैं और कई बार नहीं भी होते..तो……..फिर झींकते हुए आप एक ट्राई और मारते हैं और अबकि बार यदि किस्मत साथ है तो बर्ज वैरिफिकैशन की लाटरी मैं आपको कुछ समझने वाली आकृतियां दिखाई दे सकती हैं……..एट लास्ट   आप सफलता प्राप्त करते हैं……..आपको यूं लगता है जैसे कोई गढ जीत लिया…….पर अभी आपकी समस्या यहीं खत्म नहीं हुई ……आपकी टिप्पणी अभी भी दिखाई नहीं दे रही……..क्या हुआ……तब पता लगता है कि बिना अप्रूवल यहां आप बोल भी नहीं सकते…….अब आप सोचते हैंमैं सोचता हूं क्या मुझे पागल कुत्ते ने काटा था जो मैं यहां आया…..इससे बढिया है बंधु ब्लोग वाणी मैं ही एक श्रेणी और बना दी जाती जैसा ऊपर वाले चित्र मैं लिखा हैंwarninng trip hazard याने सावधान आप आगे वर्ड वैरिफिकैशन वाला ब्लोग है…..जरा धीरे चलिये और आपके सात बार जंचे तो ही यहां आईये…….हो सकता हैं कल को गूगल वाले ऐसी व्यवस्था भी कर दें की आप के कीमति ब्लोग पर टिप्पणी करने से पहले आपको अपने पास्पोर्ट,पैन कार्ड या राशन कार्ड की कोपी की जरूरत पङे…….वर्ड वैरिफइकैशन का कोई लाभ हो तो कोई मुझे भी समझाये……

5 comments:

Vishal Mishra said...

आपका कहना बिल्‍कुल सही है मिहिज जी, इस प्रकार की असुविधा के कारण कई बार टिप्‍पणी करने मे दिक्‍कत होती है और तो और जब आपकी टिप्‍पणी प्रकाशित न जये तो और झल होती है अ‍ाखिर हम टिप्‍पणी किये ही क्‍यो जब उसका दम घुटना तय था।

संगीता पुरी said...

ब्‍लॉगर में वर्ड वेरिफिकेशन की सुविधा दी गयी है .. ये ऑप्‍शन सेलेक्‍टेड होता है .. जब तक ब्‍लोगर इसे समझ कर दूर कर सकें .. वर्ड वेरिफिकेशन अवश्‍य ही बना रहता है .. पुराने ब्‍लोगों में से अक्‍सर इसे हटा लिया जाता है .. लेकिन कई बार पुराने ब्‍लोगर भी इसे नहीं हटाते .. इसके कारण टिप्‍पणी करने में बहुत दिक्‍कत होती है .. वास्‍तव में किसी समस्‍या से बचने के लिए रखा गया ऑप्‍शन किसी समस्‍या को ही जन्‍म दे देता है !!

महाशक्ति said...

मै आप, विशाल और संगीता पुरी सभी की बात से पूर्ण सहमत हूँ,मेरे एक विशेष लेख पर अनगिनत स्‍पैम टिप्‍पणी आ रही है, वर्ड वेरिफिकेशन होने से इससे बचा सकता है किन्‍तु नये पाठको के लिये यह बहुत ही असुविधा जनक होता है।

निर्मला कपिला said...

अपने सब के दिल की बात लिख दी। शुक्रिया

ePandit said...

आपने तो सभी टिप्पणीकारों की व्यथा को शब्दों में पिरो दिया। क्या कहें कितनी खीझ होती है वर्ड वैरीफिकेशन से, समझ में आने लायक कैप्चा पाने के लिये कई बार ट्राइ करना पड़ता है।

जो लोग कहते हैं स्पैम रोकने के लिये ये जरुरी है, मैं उनसे सहमत नहीं। स्पैम रोकने के लिये और भी तरीके हैं, और दो-चार आ भी जायें तो उनको बाद में समय मिलने पर डिलीट किया जा सकता है। दो-चार स्पैम कुछ समय पड़े रहेंगे तो ब्लॉग में घुन नहीं लग जायेगा। मैंने अपने ब्लॉगर ब्लॉग में न तो कभी वर्ड वैरीफिकेशन का उपयोग किया न ही मॉडरेशन का। वर्ड वैरीफिकेशन की दिक्कतें तो आप बता ही चुके हैं साथ ही जब टिप्पणीकार टिप्पणी लिखने के उपरान्त सन्देश पाता है कि आपकी टिप्पणी मॉडरेशन के बाद छापी जायेगी तो वह ठगा हुआ सा महसूस करता है। हर टिप्पणीकार टिप्पणी करने के बाद उसे तत्काल ब्लॉग पर देखना चाहता है, मॉडरेशन उसे हतोत्साहित करती है, वर्ड वैरीफिकेशन का तो क्या कहें, बहुत विशेष प्रिय ब्लॉग न हो तो बन्दा आगे से वहाँ टिप्पणी करने से तौबा करता है।

वर्डप्रैस ब्लॉग में इस मामले में काफी सुविधा है, अकिस्मत (Akismet) प्लगइन स्वचालित स्पैम टिप्पणियों को फिल्टर कर देता है।