03 January 2008

लादेन बना पैगम्बर ?



अमेरिका सहित विश्व के सभी लोग इस्लाम कबूल करें, यदि आतंकवाद से मुक्ति चाहते हों तो? जी हां! यह समझौता रूपी बयान तीन साल बाद मांद से बाहर निकले अमेरिका के सबसे बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का मुख्य आरोपी और कुख्यात आतंकवादी ओसामा बिन लादेन का। जिसने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले के छठीं बरसी पर एक वीडियो टेप जारी कर यह बयान दिया है।

इस बयान की समीक्षा करें तो यह साफ है कि आतंकवाद सिर्फ और सिर्फ दुनिया को इस्लामिक देशों में तब्दील कर सभी धर्मो का सफाया करना है। यदि हम लादेन को नये युग का 'पैगम्बर' कहें तो अतिश्योक्ति न होगा। क्योंकि पैगम्बर मोहम्मद साहब ने तो दुनिया में अपनी जनसंख्या बढ़ाकर इस्लाम धर्म को फैलाने का कार्य बखूबी किया था जिसके लिए उन्होेंने कई प्रकार के नियम और कानून बनाये यहां तक कितनों का कत्लेआम भी किया गया।

परन्तु इस 'पैगम्बर' ने तो आतंकवाद जैसे हथियार का प्रयोग किया है। जिसके बल पर सम्पूर्ण विश्व में मुस्लिम धर्म की स्थापना का संदेश दिया है। मैनें आतंकवाद को हथियार इसलिए कहा है कि हथियार का दूसरा नाम ही आतंकवाद है।

सच तो यह है कि ओसामा बिन लादेन ने सिर्फ दुनिया को ही नहीं वरन् अपने संतो (आतंकी गिरोहो के सरगना) को भी संदेश दे दिया है कि अब आतंकवाद का मुख्य मुद्दा आ गया है। जिसके लिए वह इतने सालों से प्रयासरत थे। इसके साथ ही सभी आतंकवादी संगठन अब 'जेहाद' के नाम पर विश्व के

समस्त मुस्लिम देश को एकता के सूत्र में पिरोना चाहेंगे और फिर शुरू होगा विश्व का सबसे बड़ा युध्द! यानी 'धर्मयुध्द' जिसमें सबकुछ होगा।

इस बयान पर यदि इस्लामिक देशों की बात करें तो उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। और कर भी नही सकते क्योकिं यदि आतंकवाद की बात करें तो सभी उस पर कार्रवाई की बात करतें है। परन्तु जब ऐसे तल्ख बयान आ रहे हों कि पूरे विश्व में इस्लाम फैलाया जायेगा तो उनका 'आपसी रिश्ता' मधुर होना लाजिमी है। जहां तक मेरा मानना है कि इस बयान से पूर्व किसी भी देश को आतंकवादियों का मुख्य मुद्दा समझ में नहीं आया रहा होगा कि आखिर इस भयानक और बड़े नरसंहार के क्या उद्देश्य हैं?

आतंकवाद जिसनें-गरीब-अमीर, मज़लूम, बेसहारा, ताकतवर, और निर्बल सभी को रक्तरंजित किया है। नाम सुनते ही रूह कांप उठती है और बरबस ही मुंह से इस काले कारनामें को अंजाम देने वाले के लिए बद्दुआ निकलती है। एक महत्वपूर्ण बात और भी समझ से परे है कि क्या मुसलमानों के पवित्र धर्म ग्रन्थ 'कुरान' में इस बात का जिक्र है कि किसी भी व्यक्ति को वह चाहे जिस वर्ग, धर्म, जाति, या देश का हो उसको किसी भी रूप अर्थात साम,दाम, दण्ड,भेद द्वारा इस्लाम धर्म ग्रहण करवाकर सम्पूर्ण विश्व को मुस्लिम देश बना दिया जाये।

यदि ऐसा है तो वह खुदा का लिखा नहीं हो सकता। क्योंकि खुदा से ऐसा लिखा ही नही जायेगा कि दूसरों का सर्वनाश करके तुम पाक हो जाओगे। और यदि नही लिखा है तो फिर इतने पवित्र ग्रन्थ (जिसके मात्र एक पन्ने के खण्डित होने पर इलाहाबाद सहर को पांच दिनों तक कर्फ्यू का दंश झेलना पड़ा) को मानने और उसी की राह पर चलने वाले ये आतंकवादी या तो मुसलमान नहीं हो सकते या फिर पवित्र धर्म ग्रन्थ 'कुरान' को नहीं मानते। यदि होते तो वह विश्व नहीं किसी क्षेत्र में खून-खराबें जैसे जघन्य अपराध करने का साहस न करते।

अब सवाल यह उठता है कि पाकिस्तान जैसे देश जो इस्लामिक राष्ट्र है। वहां फिर आतंकवादी हमला क्यों? जबकि वहां पर मुस्लिमों का आधिपत्य है। वहां पर रहने वाले अन्य धर्म के लोग केवल नाम के दूसरे धर्म के हैं बाकी सभी कार्य मुस्लिम पध्दति से ही करते हैं। एक बात तो साफ है कि मुस्लिम देश यदि आतंकवाद का विरोध करते है तो वह महज छलावा है क्योंकि अब आतंकवाद का मुख्य मुद्दा उनकी समझ में आ गया है।

विश्व के अधिकांश राष्ट्र आतंकवाद का दंश झेल रहें है। जिसमें भारत भी है। यदि भारत के पहलुओ की बात करें तो यहां एक घटना का जख्म भरने से पहले दूसरे को अंजाम देने से नहीं चूकतें। इस बात का प्रमाण्ा तो मिल ही गया कि आखिर भारतीय मंदिरों, मठों तथा अन्य धार्मिक और पवित्र स्थलों, प्रतिष्ठानों पर ज्यादा आतंकी हमलें क्यों होतें है। भारत को ओसामा बिन लादेन के संत (दाउद इब्राहिम, अबू सलेम, छोटा राजन जैसे तमाम आतंकी) जो आतंकवाद को प्रचारित-प्रसारित कर रहें है उन्होनें इस विश्व के एक मात्र हिन्दू राष्ट्र को पूरी तरह से घेर रखा है। और जगह-जगह अपने 'आतंकी धर्मड्डा' की स्थापना कर रहें है।

एक प्रकार से यह भी कहा जा सकता है कि जिस प्रकार भारत में नहीं अपितु विश्व के अनेक देशों में विशेश धर्म प्रचारक नये धर्मों का प्रचार-प्रसार कर अपने धर्मानुयायी बनाये। ठीक उसी प्रकार यह आतंकी धर्म के अधिकंाशत: बेरोजगार लोग ही अनुयायी बन रहे है। जिसके लिए हमें अपने आपको सम्भालना होगा। अब वह दिन दूर नहीं जब ऐलान किया जायेगा कि सभी 'संत' अपने 'कार्य' को पूर्ण करें। तब मित्र राष्ट्र सहित विशेस धर्म राष्ट्र और आतंकी तथा मुस्लिम राष्ट्र के बीच ''जंग-ए-जेहाद'' छिड़ जायेगा

3 comments:

हरिमोहन सिंह said...

मुझे पैगम्‍बर शब्‍द पर आपत्ति है इसे आप लादेन के साथ नही जोड सकते । वैसे लादेन अपनी खुद की नजर में खुद को पैगम्‍बर ही समझता होगा

mahashakti said...

मुझे नही लगता है कि पैगम्‍बर शब्‍द का उपयोग गलत है। आपने अच्‍छा लिखा है लिखते रहे।

Tara Chandra Gupta said...

ji harimohan ji laden khud ko pagambe samghta hai.