17 March 2010

शहीद - ए - आजम भगत सिंह - 8

शहीद - ए - आजम भगत सिंह - 8

चले मुकदमें भगत सिंह पर,
और अनेक क्रांतिवीरों पर .
सत्ता ने फाँसी ठानी थी,
मुकदमों को दी रवानी थी .

भगत सिंह का आक्रोश रोष,
क्रांतिवीर का जयनाद जोश .
इंकलाब जिंदाबाद घोष,
आजादी का बना उदघोष .

इतिहास दिवस लो आया था,
निर्णय कोर्ट का लाया था .
जिस दिन की थे बाट जोहते,
दिन दिन गिन कर राह देखते .

घड़ी सुहानी वह आई थी,
बासंती में रंग लाई थी .
सहमी सत्ता ने दी पुकार,
फाँसी की थी उसे दरकार .

कोर्ट फैसला तय था फाँसी,
चौबीस मार्च दे दो फाँसी .
सन एकतीस की यह थी बात
जग रहा भाग्य भारत प्रभात .

क्रांति गतिविधियों में लिप्त थे,
आभा से मुख शौर्य दीप्त थे .
’राजगुरू’, ’सुखदेव’, ’भगत सिंह’,
फांसी लेंगे यह भारत सिंह .

गीत मिलन के तीनों गाते,
हँस हँस कर थे मौत बुलाते .
चोले को बासंती रंग माँ,
देख पुकार रही भारत माँ .

भारत जकड़ा जंजीरों में,
कूद पड़े तब हवन कुण्ड में .
आन बचाने यह भारत सिंह,
राजगुरू, सुखदेव, भगत सिंह .

सभी जुबाँ पर एक कहानी,
क्रांति वीरता भरी जवानी .
फैला जन जन क्रांति ज्वार था,
स्वतंत्रता का ही विचार था .

अभीष्ट पूरा हुआ भगत सिंह,
गर्जन थी अब हर भारत सिंह .
पैदा कर दी हर दिल चाहत,
बिन आजादी मन है आहत .

मात पिता को जेल बुलाया,
बेटे ने संदेश सुनाया .
भगत देश पर होगा शहीद,
पूरी होगी मेरी मुरीद .

दुख का आँसू आँख न लाना,
समय है मेरा मुझको जाना .
पूत आपका हो बलिदानी,
अपने खूँ से लिखे कहानी .

जन्म दिया माँ तुमने मुझको,
शीश नवाऊँ शत शत तुमको .
माता धरती, पिता आकाश,
उनके चरणों स्वर्ग का वास .

माँ तेरा उपकार बड़ा है,
किंतु देश का फ़र्ज़ पड़ा है .
भारत माँ का कर्ज़ बड़ा है,
राष्ट्र बेड़ियों में जकड़ा है .

मचल रहे अरमाँ कुरबानी,
झड़ी लगा दे अपनी जबानी,
दे दे कर आशीष अनेकों,
घड़ी शहादत आयी देखो .

देख देख जग विस्मृत होगा,
पढ़ इतिहास चमत्कृत होगा .
मुझको इतिहास बदलना है,
अब यह साम्राज्य निगलना है .

मोल नही कुछ मान मुकुट का,
मोल नही कुछ सिंहासन का .
जीवन अर्पित करने आया,
माटी कर्ज़ चुकाने आया .

याचक बन कर मांग रहा हूँ,
तेरा दुख पहचान रहा हूँ .
लाल जो खेला तेरी गोदी,
डाल दे भारत माँ की गोदी .

तेरा तो घर द्वार क्रांति का,
तू जननी है स्रोत क्रांति का .
कोख पे अपनी कर अभिमान,
पाऊँ शहादत, दे वरदान .

एक पूत का गम मत करना,
सब तरुणों को पूत समझना .
जग में तेरा सदा सम्म्मान,
युगों युगों तक रहेगा मान .

खानदान की रीत निभाई,
राह क्रांति की मैने पाई .
दादा, चाचा, पिता कदम पर,
खून खौलता दीन दमन पर .

माता कर दो अब विदा विदा,
हो जाऊँ वतन पर फ़िदा फ़िदा .
रहे अभागे जो सदा सदा,
खुशियाँ हों उनको अदा अदा .

कवि कुलवंत सिंह

1 comment:

महाशक्ति said...

शहीद भगत सिं‍ह पर जारी आपकी यह सीरीज बहुत प्रेरणा दायी रही बहुत अच्‍छा रहा काव्‍य के रूप से इसे प्रस्‍तुत करना