24 April 2008

शिक्षा या व्यापार?

शिक्षा का महत्व क्या है, इससे हमसब अनजान नही हैं। शिक्षा वह है, जो किसी व्यक्ति के अन्दर उसके होने की अनुभूति का समावेश करती है। शिक्षा वो है, जो एक बच्चे को एक प्रभावशाली व्यक्ति बनाती है । शिक्षा वो है, जो व्यक्तित्व का विकास करके उसे समाज और देश के कल्याण करने योग्य बनाती है।

आजकल शिक्षा के बारे में अगर सोचें तो याद आता है एक व्यवसाय जो सबसे ज्यादा धन देता है और वो भी सबसे कम निवेश पर । शायद इसीलिए हर गली, हर मोड़ पर शिक्षा का दर्पण कहे जाने वाले शिक्षण संस्थान खुलते जा रहे हैं। प्राथमिक शिक्षा तो एक ऐसा व्यवसाय बन गया है , जो हर वो व्यक्ति करना शुरू कर देता है , जिसने किसी कारण से प्रभावित होकर कोई अन्य व्यवसाय न कर पाया, ये उसकी शिक्षा के व्यवसाय के अनुरूप न होने के कारण हुआ हो या, किसी अन्य कारण से।

उच्च शिक्षा एक और उदाहरण है इस बात का, विशेषकर व्यापार प्रबंधन संस्थान, ये तो लगता है लोगों का अधिकार बन गया है, जो बिना किसी सही प्रारूप के शुरू कर दिया जाता है। नतीजा भुगतते हैं वो विद्यार्थी जो इन संस्थानों के चक्कर में पड़कर अपना समय और पैसा बर्बाद कर देते हैं.

ऐसे संस्थानों की एक खासियत है, इनमे से बहुत से संस्थानों के पाठ्यक्रम को सरकार के किसी संस्था द्वारा मान्यता नहीं प्राप्त होता, जैसे कि AICTE, या UGC के द्वारा मान्यता नहीं प्राप्त होता, जिसके चलते शिक्षार्थियों को बहुत ही तकलीफों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि उनकी पहली जॉब में बहुत सी मुश्किलें आती हैं और उनका जॉब प्रोफाइल भी अन्य व्यापार प्रबंधन की परा स्नातक की उपाधि प्राप्त लोगों के नीचे की होती है.

आम तौर पर ये शिक्षण संस्थान उसके लिए द्वि उपाधि का लालच देते हैं, एक जिसको किसी संस्था की मान्यता प्राप्त नहीं होती, और दूसरी वो जो दूर शिक्षा प्राधिकरण के अंदर आती है।

आप सबों से यही उम्मीद है की अपने परिचितों को ऐसे संस्थानों के चक्कर में पड़ने से बचायेंगे, अन्यथा ऐसे ही देश का एक बहुत बड़ा शिक्षार्थी वर्ग अपना मार्ग नहीं पा सकेगा.

3 comments:

राज भाटिय़ा said...

आप ने बिलकुल सही कहा हे भारत मे शिक्षा एक व्यापार ही बन गई हे , दो चार देशो कॊ छोड कर पुरे वि्श्व मे शिक्षा फ़्रि हे.

mahashakti said...

आज शिक्षा पंसारी को दुकान हो गई है, विद्यालय में प्रवेश लेने से लेकर परीक्षा देने तक में, हर दौर में शिक्षा बिक रही है। और इस शिक्षा के बाजार में पिस रहा है तो केवल प्रतिभाऍं

Rajeev said...

आपलोगों को धन्यवाद!
आपके प्रोत्साहन के कारण शायद मैं इस लायक बनूँ की आगे भी किसी सामजिक कुरीति के खिलाफ लिखता रहूँ..