28 February 2008

ताज महल या तेजो महालय : एक प्रश्न






ताज महल (हवाई दृश्य )







गुम्बद और ध्वज का नजदीक से दृश्य









सामने से दृश्य ताज का









वो जगह जहाँ के बारे में कहा जाता है कि मुमताज़ को दफनाया गया









बर्हंपुर का महल जहाँ मुमताज़ की मृत्यु हुई











ईंटों से बंद किया हुआ दरवाज़ा जिसने सारे सबूतों को छिपाने में मदद की है









बड़ा सा बंद रोशनदान








वेदिक डिजाईन एक बंद कमरे की छत पर












एक और कमरे का अंदरूनी दृश्य







२२ गुप्त कमरों में से एक का अंदरूनी दृश्य











निचले तल के २२ गुप्त कमरों में से एक














३०० फीट लंबा गलियारा













उपरी तल पर जाने की सीढ़ी












, दीवार के फूलों में






निचले तल का संगमरमर युक्त कक्ष






उपरी तल पर एक बंद कमरा









संगीत कक्ष (एक और अपवाद )











ताज के पिछले भाग में बने खिड़की और दरवाजे जिन्हें बंद कर दिया गया है







ताज और उसके २२ भागों का पिछला दृश्यावलोकन










लाल गुलाब द्वार के ठीक ऊपर












ताज के बाहर में एक प्रतिबिम्ब ध्वज का










एक ईंटों की दीवार जिसने काफी सारे सबूत छिपा दिए हैं










अंदरूनी कुआँ







अपनी एक किताब "Taj Mahal : A True Story " में प्रो पी एन ओक ने इसका प्रतिवाद किया है॥
उन्होंने कहा है कि ताज किसी मुमताज की कब्रगाह नहीं बल्कि हिन्दुओं का देव स्थान " शिव मन्दिर" था। और इसका वास्तविक नाम तेजो महालय है। आपने छानबीन के दौरान उन्होंने ये जन की तेजो महालय , शाह जहाँ ने जयपुर के राजा जय सिन्ह से हड़प लिया था। ये तो अपने बादशाह-नामा में भी शाह जहाँ ने कबूला है की एक बेहद खूबसूरत इमारत उन्होंने ली थी, मुमताज की कब्रगाह बनने के लिए।
कुछ और भी बातें हैं जो इस बात को सत्यापित करतीं हैं : जैसे कि
  • किसी भी मुस्लिम राज्य में किसी इमारत (कब्रगाह की ) के नाम में महल नही होता ॥
  • किसी भी मुस्लिम कब्रगाह को किसी नदी के पास नही बनाया गया।
  • कमल वेदिक कलाकृतियों में इस्तेमाल होती थी, नाकि मुग़ल कलाकृतियों में।
पता नहीं सच्चाई क्या है, पर इतना तो जरुर सत्य है कि हमारी इतिहास कि किताबों ने हमें गुमराह ही किया है इतिहास के बारे में ।

ऐसे बहुत सारे सन्दर्भ हैं जो यह साबित करतें हैं कि हमारी इतिहास की किताबें सरकारों के अनुसार बदलती रही हैं । मसलन आप अभी के हालत भी देख सकते हैं, की देश में सत्ता परिवर्तन के बाद कैसे इतिहास की पुस्तकों में भरी फेर बदल होता है।


भारतीयों ने अगर इन सब बातों के ख़िलाफ़ आवाज़ नही उठाई तो उन्हें अपने इतिहास पर गौरव करने का अधिकार भी खोना पड़ सकता है।


तो क्या ये समय है हल्ला बोलने का ? क्या अब हम सब भारतीय एक साथ हल्ला बोलेंगे ?
इन सब सवालों का जवाब तो वक्त देगा॥


21 comments:

Neeraj Rohilla said...

पी. एन. ओक(ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे) के एक और प्रशंसक को नमस्कार :-)

पी. एन. ओक की इस कांसपिरेसी थ्योरी पर काफ़ी पहले मैने एक पोस्ट लिखी थी, आप अवश्य पढें ।

http://antardhwani.blogspot.com/2007/06/blog-post.html

साभार,

मानवेन्‍द्र प्रताप सिंह said...

बहुत ही अच्‍छा लेख, "Taj Mahal : A True Story " में प्रो पी एन ओक ने सच्‍चाई समाने लाई है जो आज के बहुत से व्‍यक्ति स्‍वीकार करने में हिचकते है, आपके द्वारा प्रस्‍तुत तर्क का समर्थन पूरा भारतीय जनमानस करता है।

अच्‍छी जानकारी लेकर आये है, बधाई।

Anonymous said...

अगर यह बात साबित हो भी जाती है कि ताज महल एक मन्दिर था जिसे हिन्दुओं द्वारा बनवाया गया था, तों इससे कुछ हासिल नही होने वाला | क्यों हम लोग हमेशा धर्म को हर बात में घसीटते है ? कब हम ये समझेंगे की जब तक हम धर्म की दीवार को नही तोड़ेंगे, तक तक हम विकास नही कर सकते ? अपने मत भी लिखिए.....

रीतेश रंजन said...

मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की वो प्यार की मिसाल इमारत है, या कोई शिव मंदिर ...
मुझे सरकारों के दखलंदाजी से ऐतराज़ है.. हमारी शिक्षण व्यवस्था में...
एक सरकार आती है वो कहती है कि १८५७ क्रांति का तात्कालिक कारण गोलियां थी.. जो हमारे सैनिकों के धार्मिक भावना को चोट पहुंचती थीं...
दूसरी सरकार आती है और उस संदर्भ को पुस्तकों से हटा देती है..

Anonymous said...

मैंने धर्मं की बात नहीं की ...
शायद आपने अंत में लिखा हुआ भाग नहीं पढा ...
मैं सरकारों की हमारे इतिहास की किताबों में बढ़ती दखलंदाजी के विरोध में ये संदर्भ लिया है...

Neeraj Rohilla said...

मूल मुद्दे से भटकाव की यही प्रवत्ति ओक और वर्तक के लेखों में मिलती है | ताजमहल पर बात कर रहे हैं तो उसी पर केंद्रित रहें, नीम/योग को उसमें न मिलायें | अमेरिका ने भले ही नीम का पेटेंट ले लिया हो लेकिन इसका ये अर्थ नहीं कि भारत नीम को भूल गया, ठीक यही बात योग पर भी लागू होती है |

मैं अभी भी यही कहता हूँ कि हमारी किव्दंतिया और लोक इतिहास स्म्रति से इतनी जल्दी नहीं मिटता है | जब अयोध्या के आस पास बाबरी मस्जिद बनने के बारे में कथाये हैं तो मथुरा आगरा वाले तेजो महालय से ताज महल बनने की घटना को कैसे नजरअंदाज कर सकते हैं |

mahashakti said...

नीरज भाई आपकी बात सत्‍य है, आज इतिहास को भूला कर वर्तमान ठीक करने की कोशिश की जा रही है यह गलत है, जैसा कि रीतेश जी ने कहा कि 1857 की प्रमुख घटना गोली पर धर्मभ्रष्‍ट करने वाले तत्‍व का लगा होना था। वैसे ही आज देश को अगर कोई चीज एकता में बांध सकती है तो वह है हिन्दू धर्म।

ताजमहल वास्‍तव में एक हिन्‍दू मन्दिर था, जिसे मुगलों से गलत ढ़ंग से षड़यंत्र का शिकार बना लिया।

Mayank said...

अगर सारा देश भी इस बार को स्वीकार कर ले की ताजमहल एक हिंदू मन्दिर है तो भी सरकार इसको हिंदू मन्दिर घोषित नहीं करेगी. कारण, मुसलमानो का वोट बैंक चला जाएगा. दूसरा, टूरिस्ट नहीं आने के. वो लोग ताजमहल को प्यार की मिसाल मान कर ही इसको देखने आते हैं हिंदू मन्दिर को देखने नहीं आयेंगे. सरकार को करोडो का नुकसान होगा.

Tara Chandra Gupta said...

ritesh ji mai aapki bat se sahamt hoon.kyonki ji tarah se mugal kal me kivi aur itihaskar likhte the o puri tarah se shasak k paksh me rahta tha. jivika k liye raja hi tha. example k taur per varanashi aur mathra dono sthano per hindu mandir k sath masjid bhi hai yadi kabhi aisa ho ki muslim rajya aaye to mandir ka vilupt hona swabhavik hai. bahut achha likhte rahiye.

रीतेश रंजन said...

भाई बात केवल मुगलों के दौरान की नहीं है....
हमारे इतिहासकार हर काल में रजा की बात लिखते आये हैं...
आज़ाद भारत ही ले लो...
बहुत सी बतिएँ गोल हो जाती हैं..
मसलन नेताजी का कद नेहरू वगैरह के सामने छोटा कर दिया जाता है...
गाँधी के उन इशारों को गायब कर दिया जाता है जिनसे भगत सिंह वगैरह की जान गयी..और उन्हें सत्य और अहिंसा के प्रतीक के रूप में प्राच्रित किया जाता है..तथाकथित सेकुलर सरकार अति है तो इतिहास के कई तथ्यों को पुस्तकों से हटा दिया जाता है...
और भी बहुत से किस्से हैं... जिनसे मुझे ऐतराज़ है..

Anonymous said...

tajmahal ek mandir hai is baat ko koi nahi kahiga

akanksha said...

i dont know what to say, mujhe yakeen nahi ho raha ki India hinduo ka desh hai.Hamare prachin shiv mandir ko koi mughal makbara bata raha hai aur hun sab sach jante hue bhi haath par hath de kar baithe hue hai.waise to hum bahut deenge hankete hai ki hum bhagwan religion jaisi baton ko bahut jor dete hai, par jab yeh jaan chuke hai ki taj mahal ek shiv mandir tha aur wahan ke kisi band kamron me se ek me Shiv ji ka sir kati murti bhi hain hum kuch nahi kar rahe hai, aakhir kyon.hamare bhagwan ka itna apmaan,unki shivling par kabr bana dena ,yeh mere bardasht se bahar hai, aur main aisi sarkaar se bahut hi unsatisfied hun ki sab jaante hue bhi woh kuch nahi kar rahi,woh 22 kamron ko kyon khulwa ke nahi delhti, agar hum galat hain to humein saabit karo, warna hum to yahi mante rahnge ki taj mahal , talmahal na hokar tejo mahalaya hai.

Anonymous said...

Hi
Bhaiyon ye sab baten kyun kar rahe ho?Hum logon ke pass koi kaam hai nahin bas yahi karte rehte hain hun. kyunki kabaddi humara hi game hai to hum logo ko ye achchi tarah aata hai. bas tang khinchna ek doosre ki.Are yaron koi ek mandir hamare bharat main aisa hai jismen musalmano ki masjid aor dargaho ki tarah meenaren (towers ) hote hon. hai koi aisa mandir? jo muslim shely main bana ho ? ya jis mandir main hi masjid bani huee ho ? hai kya koi ek bata do yaron.ye to un mughal badshahon ki chutiya panti thee jinhone hindustan main ekta rakhne ke liye aor ekta ko darshane ke liye aor hamare bharat ke culture pasand karke , hamari bhawan sheliyon ka samavesh apne building main kiya. aor hum logo ko bahana mil gaya ladne ka.Taj mahal ka sahi naam tha"Mumtaz mahal". Mahal urdu ka lafz hai na ki arabi ka pehli baat.doosri baat urdu ka janam india main hua akbar ke zamane main , akabar ke dwara.teesree baat mahal kehte hain shandar building ko .4thee baat, mumtaz mahal bigad kar bana diya gaya "Taj mahal". jaise "Allahabad ka ilahabad, shah harun pur ko bana diya saharanpur, aor to aor shah abbas jo ki arab ka ek badshah the , jisne kai achchae kaam kiye wahan uske zamane main log jab ko achcha kaam karte the to us bande ko log kehte the "shah abbas" shah means badshah, ab kalantar main iska roop bigad kar ho gaya hai "shabas" jo hum abhi bhi koi achcha kaam kare to use bol dete hai ki "shabas bhai".to ham to zamane se naamo ko bigadte aaye hain.ab kisi P.N. saheb ne apne aap ko chamkane ke liye koi reseach kar lee. hum sab bewakuf lag gaye ise sahi karne main.

Anonymous said...

# किसी भी मुस्लिम राज्य में किसी इमारत (कब्रगाह की ) के नाम में महल नही होता ॥ye zaroori nahin hai. it is depends on the person who is acctually build the building ki wo us building ka naam kya rakhega.kya koi hidnu apne mandir ka naam mahal rakh sakta hai kya?# किसी भी मुस्लिम कब्रगाह को किसी नदी के पास नही बनाया गया।ye to koi baat hi nahin huee bhaiyon. jisko jahan pasand ho wahan building banwayega na. aisa islam main koi manahi nahin hai ki aapki kabr kahan honi chahiye. pani ke paas ya door. jahan jagah aapko mile wahin dafna do jaisa maine apne kuchh muslim doston se aor muslim panditon se poochha hai.# कमल वेदिक कलाकृतियों में इस्तेमाल होती थी, नाकि मुग़ल कलाकृतियों में। yahi to mughlon ki chutiya panti hai ki bhartiye shelly ka samavesh apni building main karte the bhawavesh main aakar keh lo , rajneeti ke liye keh lo ya indian culture se pyar ke liye keh lo.. par ek baat pakki hai ki unke is baat ne india ko khoob aag main jhulsa diya hai . babri masjid se lekar ab tak. Taj mahal main neeche jane ka jo rasta hai wohin asli kabr hai shahjahn aor mumtaz ki. kyunki islam main pakki kabar banana mana hai isliye upar sirf un kabron ko chinhon ya ishare ke taur par banaya gaya hai. taki upar aane walon ko pata rahe ki kabr in uper ki kabron ke theek neeche hai. wahan koi shiv ling nahin hai. na hi kahin pani tapakta hai . pani tapkega to uska source bhi hona chahiye na. pehle to wo source batao kahan hai. kya ye baat P.N saheb ne nahin batayi kya?sare taj mahal main to ghoom aaye janab aor ye nahin bataya ki pani ka source kahan hai . shabas P.N saheb . bewakufon ko ladwane ka khoob intezam kiya aapne ha hahaha ha.Taj mahal ka gumbad indian shelly ka hai aor building mughal shelly ki hai. kahin is mughal shely ka mandir dekhahai poore india men, gumbad ko chhor kar . kyun gumbad banaya hi indian shelly main hai.taj ki sarti khoobsoorti uski meenaron se hi hai. zara kalpana karo bina meenaron wale taj ki . ye ek simplemakbara lagega jo india main jagah jagah hain. aor meenaren hindu mandir ya bhawano ya building main nahin hoti hai .To bhaiyon apne mind ko sahi karo aor india ko andhere main dhkelne ke bajaye ise us manzil tak pahunchane main apna mind lagao jis india ko dekh kar sara world kahe ki ekho ye hain indians. Aor insan aise hi hote hain. ladte to janwar hain. Aor hum janwar nahin hai.akahnd, shaleen , viksit aor shant bharat ka swapn apni aankhon main basane wala ..aapka bhai
Naam nahin likhunga main aapna ..
kyunki hum naam main mazhab dhoondh lete hain..

Ek bharatiye

seefan said...
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seefan said...

sahi hai bhai . main jaipur ka hun aor jaipur main ek bhi building taj jaisi nahin hai.
Phir raja jaisingh jaipur chhod kar aagra kyun gaye taj banane ..
Sochne wali baat to yahi hai ..
kya unhen jaipur achcha nahin laga tha. jiske liye unhone itna kiya . is tarah basaya jaipur ko ki aaj bhi log dekhne aate hain jaipur ki basawat ko.

yahan tak ki bill clinton bhi .
phir aagre main taj kyun banwaya aor in musalmano ki quran ke shlok kyun likhwaye taj par.
samajh se pare hai ye baten.

Anonymous said...

sochne ka pehle nazariya badlo.. phir wapas dekho uper ke photos ko ..tumhen sirf Taj mahal bharat ki shan ki khoobsoorti hi dikhayi degi .. aor kuchh nahin

Anonymous said...

sangeet kaksh apwad kyun hai .. islam main bahot bade bade sangeet widwan hue hain..

Ammer khusro
Bulle shah
umar khayyam
tansen jo baad main muslim ho gaye the
etc.

Anonymous said...

islam main mandir ya koi aor dharam walon ki pooja sthal ko tod kar koi masjid ya makbara banana gunah hota hai . wahan ibadat ho hi nahin sakti ... phir mughl jo muslim the kaise shiv mandir ko tod kar makbara bana sakte the

ravi said...

hame apna hak lene mein kya harz hai. pata nahi islamic kya chate hai suru se hi luta hai sabhi ko

Pankaj Rawat said...

han han apke sath h.