27 May 2009

पर्यावरण की सुरक्षा करना आपका और हम सबका नैतिक दायित्व है

ॐ श्री गणेशाय नमः

प्रिय मित्रो/बहिनों और भाइओ

आगे समाचार यह है कि यहाँ सब शेष कुशल है और इश्वर से प्राथना करत है कि आप सभी कुशल मंगल होंगे. मोडा-मोढी अच्छे से गरमी की छुट्टी मनात होंगे या घरवाली के साथ तुम्हारी ससुराल गयेन हुइए और मौजा मौजा करत हुइए. भैय्या इ साल तो गरमी गजब को रंग दिखात है. आसमान तो दहाड़ने लगे है और शहर के उपर बादलो की जमात भी दिखाई दें लगी है और लगत है कै अबकी अगले हफ्ते तक पानी आ जाहे.

हाँ बरसात आ रही है सो मोरे दिमाग में जा बात आई कि लगे हाथो बरसात में अपन भी पर्यावरण की सुरक्षा का संकल्प ले. जगह इसकी अलग जगावे कै अबकी बरस से हम पौधे खूब लगावे और इसकी देखरेख और सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल ले नाइ तो शुद्ध हवा जब अपनी अलगी पीढी को न मिलहे तो वे सबई अपनी पीढी को गली बकहे जा अच्छी तरह से अबे से समझ लो का समझे ? हाँ बड्डे जा मेरो सन्देश अपनी पंचायत में भी कहके सुना दई . उखो मजनून नीचे लिख रहो हूँ...

मित्रो स्वागत समारोहो मे पुष्पो का जमकर उपयोग किया जाता है. हँसते फूलो को हम साथी पौधो से अलग कर हम पर्यावरण को नुक़सान तो पहुंचाते है और प्राकृतिक सौंदर्य को क्षति पहुंचाते है फिर स्वागत समारोह के बाद इन फूलो को बेदर्दी से कूड़ेदान मे हम सबई फेक देत है. जैसा कि आपको मालूम है ग्लोबल वार्मिंग के कारण मानव जीवन ख़तरे मे है अब पर्यावरण को सुरक्षित रखने की ज़िम्मेदारी आपकी और हम सबकी है.

मित्रो मेरा एक सुझाव है कि जब भी कोई स्वागत समारोह हो या कोई अतिथि का सम्मान करना हो तो आप पुष्प मालाओ, पुष्प गुच्च की जगह अतिथि को एक पौधा भेट करे और हाथ जोड़कर निवेदन करे कि आप इस पौधे की सुरक्षा और सरक्षण करे यह आपकी नैतिक ज़िम्मेदारी है और पर्यावरण की सुरक्षा हेतु यह कार्य नितांत मानव के कल्याण के लिए आवश्यक है. भविष्य मे जब अतिथि को भेट किया गया पौधा बढ़ता आप देखेगे तो आपका मन प्रफुल्लित हो उठेगा. कृपया संकल्प ले कि हम मुस्कुराते फूलो को न तोडेंगे और कभी प्रकृति के सौंदर्य से खिलवाड़ नही करेगे और इस तरह से आप स्वागत समारोहो मे फूल मालाओ की जगह अतिथि को एक पौधा प्रदान करेगे और अतिथि को पर्यावरण की सुरक्षा करने का संदेश भी देंगे. हाँ अपने जन्मदिन के अवसर पर भी पौधा जरुर लगाए और जन्मदिन को यादगार बनाए.



मोरी फोटो जन्मदिन पे पौधारोपण करत भये.

अखीर में भैय्या जा चिठ्ठी हर बरसात आवे के पहले मै अपनो खो लिख देत हूँ . जा मेरी चिठ्ठी तुमखो पुन्य के कारज से लिख रहा हूँ. चलो अब चिठ्ठी बंद करत हूँ काय से आज से हमें भी अपनी बगिया सजाना संभारना है. खर पतवार भी साफ करने है.

पर्यावरण की सुरक्षा करना आपका और हम सबका नैतिक दायित्व है.
जय राम जी की

3 comments:

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर लगा, मेरी तरफ़ से आप को धन्यवाद इस नेक ओर अच्छी सलाह के लिये

"मुकुल:प्रस्तोता:बावरे फकीरा " said...

Swagatam
satak ke lie

mahashakti said...

बहुत ही नेक काम है जन्‍मदिन पर पेड को जन्‍म देने का

जन्‍मदिन की बहुत बहुत बधाई