20 September 2008

इस्लामिक आंतकवाद को संगरक्षण क्यो ?

आतंकवाद की जडे जिस प्रकार पूरे भारत में फैल रही है उससे देश की आंतरिक सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। आज देश का कोई भी इलाका इस इस्‍लामिक आंतकवाद के खतरे से बचा हुआ नही है। भारत जैसे सास्‍कृतिक देश में इन आतंकवादियों ने दहसतगर्दी के बल पर लोड़ने की कोशिश कर रहे है। पिछले कुछ महिनो से जिस प्रकार भारत के कई बड़े शहर इस्‍लामिक दहशतगर्दी के शिकार हो रहे है, यह सरकार और जनता के लिये सोच का विषय होना चाहिये। 

हमारी सबसे बड़ी कमजोरी है हमारी तुष्टिकरण की नीतियॉं इन नीतियों के कारण हम अपने राष्‍ट्र में विष बीच बो रहे है। आज देश में सबसे बड़ी आवाश्यकता है तो समान नागरिक सहिंता की जिससे देश के पुर्नविभाजन को रोका जा सकें। आज हमारे सामने ऐसी परिस्‍थतियॉं आ रही है कि भारत के ही कितने पाकिस्‍तान का निर्माण हो चुका है। मऊ तथा गुजरात के दंगों के दौरान यह शिद्ध भी हो चुका है। आज इन आंतकवादियों को सबसे बड़ा केन्‍द्र आजमगढ़ बन रहा है। अखिर कब तक देश की सरकार मुस्लिम वोटो के नाम पर इस्‍लामिक आंतकवाद को संगरक्षण देती रहेगी ?  

5 comments:

Anil Pusadkar said...

जब तक हिन्दू टुकडो मे बटा रहेगा,या फ़िर हिन्दू उग्रवाद जब तक नही पनपेगा,इस समस्या का हल अब शासन या प्रशासन के बस का नही है,इससे सामाजिक बद्लाव से ही निपटा ज़ा सकता है

Ghost Buster said...

इस्लामिक आतंकवाद केवल भारतवर्ष की समस्या नहीं है. आज पूरी दुनिया इसके कहर से प्रताडित है. इसे मूल रूप से समझने के लिए आपको इस्लाम के मूल चरित्र को समझना पड़ेगा.

यहाँ मैं अनिल जी से असहमत हूँ. आप हिन्दुओं से आतंकवाद की भाषा में जवाब देने की आशा नहीं कर सकते. ये उनके स्वभाव में ही नहीं है. ऊपर से हजार बरसों की गुलामी ने सारा आत्मसम्मान धूल में मिला दिया है. अपने आप को सेकुलर दिखाकर झूठी वाहवाही लूटने का लालच सभी सच्चाइयों को ठेंगा दिखने के लिए काफी है.

Suresh Chandra Gupta said...

आतंकवाद का मुझे एक ही हल नजर आता है, और वह है आम आदमी का आपसी प्रेम. हिन्दुस्तान का आम आदमी, जो हिंदू है, मुसलमान है, सिख है, ईसाई है. आतंकवादी आम आदमी को आपस में लड़ाना चाहते हैं. यही इस देश के नेता भी चाहते हैं. मकसद अलग हो सकते हैं पर तरीका एक है - नफरत पैदा करो. इस का मुकाबला केवल आपसी प्रेम से हो सकता है.

Anonymous said...

aaj jyada tar aatankvadi muslim hai kintu sarkar inhe apne sangrakshn de rahi hai ji purnth galat hai.

रीतेश रंजन said...

आज ऐसा समय आ गया है जब देश के जनमानस उस समझना चाहिए की देश के खिलाफ काम करने वाले, और खुले आम घूमने वाले आतंकवादियों से बड़ी आतंकवादी हमारे देश की सरकारें हैं जो इनको संरक्षण देती है...आज हमारे पास आतंकवादियों से मुकाबला करने उस एक कानून भी नहीं है....हमें आतंकवादी सरकारों के खिलाफ युद्ध छेड़ने की जरुरत है.. वरना कल उस स्तिथि और भी विकट हो जायेगी और हमारे वंशज हमें कोसेंगे...